बाघ बचाओ पर निबंध – पढ़े यहाँ Save Tiger Essay In Hindi

प्रस्तावना:

बाघ हमारे देश का राष्ट्रीय पशु हैं | बाघ यह सबसे बड़ा और मांसाहारी जानवर हैं | बाघ अपनी शाही दिखावट के कारण हमारे देश के राष्ट्रीय पशु के रूप में उसे घोषित किया गया हैं |

यह बहुत ताकतवर, अपने आकर्षण, शक्ति और चपलता के कारण बहुत प्रसिद्ध हैं | बाघ पुरे विश्व  में पाए जाते हैं | इनकी बहुत सी प्रजाति और उपप्रजाति भी हैं | कुछ कारणों की वजह से बाघ की प्रजाति लुप्त होती जा रही हैं |

अलग – अलग रंगों

बाघ विभिन्न रंगों में पाए जाते हैं | जैसे की उनके शरीर पर काली धारियों के साथ नारंगी, सफ़ेद और नीला रंग पाया जाता हैं | बाघ के नीचे का पेट वाला भाग सफ़ेद रंग का होता हैं |

बाघ की प्रजाति

बाघ की लगभग आठ प्रजातियां होती हैं | भारतीय प्रजाति के बाघ को ‘रॉयल बंगाल टाइगर’ कहा जाता हैं | वो प्रजाति और उपप्रजाति के साथ अन्य स्थानों पर भिन्न-भिन्न आकार और वजन के पाए जाते हैं | साइबेरियन टाइगर यह सबसे बड़ा बाघ माना जाता हैं |

रॉयल बंगाल टायगर यह ज्यादा तो जंगलों और नदी के किनारे रहते हैं और सायबेरियन टायगर ठंडे

विभिन्न देशों में

भारत देश में भी बहुत सी जगहों पर बाघ पाए जाते हैं | बाघ भारत देश के साथ – साथ बांग्लादेश, कम्बोडिया, इंडोनेशिया, म्यानमार, नेपाल, मलेशिया, रूस, भूटान, थायलंड इत्यादि, अन्य देशों में भी पाए जाते हैं |

संबंधित लेख:  छुट्टी के दिन पर निबंध - पढ़े यहाँ Essay On Holiday In Hindi

राष्ट्रीय पशु

बाघ शक्तिशाली, ताकदवान और चपलता के कारण उसे राष्ट्रीय पशु के रूप में चुना गया हैं | बाघ को जंगल का राजा भी कहा जाता हैं और उसे ‘रॉयल बंगाल टायगर’ के नाम से भी जानते हैं |

बाघ एक हिंसक पशु

बाघ यह एक हिंसक जानवर हैं | जो छोटे छोटे जीवों को खाकर अपना पेट भरता हैं | बाघ अपनी शिकार (जैसे की हिरन, जेब्रा और अन्य जानवरों) को बहुत मजबूत पकड़कर रखता हैं और अपने मजबूत जबड़ों और तेज पंजों के माध्यम से आक्रमण करता हैं |

बाघ की प्रजाति कम होने के कारण

मनुष्य वनों की कटाई करता हैं इसलिए उनके रहने के लिए उचित स्थान नही मिल पाता हैं और कई लोग बाघ की शिकार करते हैं | उसके कारण बाघ की संख्या कम होती जा रही हैं | बाघ की शिकार करके लोग उनकी बहुमूल्य खाल को बेचते हैं |

वो खाल बहुउपयोगी हैं | उसके साथ साथ उनके पंजे भी बहुत किमती होते हैं | इसलिए लोग उनका शिकार करते हैं | लोग शिकार करने के वजह से उनकी संख्या बहुत कम हो गयी हैं |

प्रोजेक्ट टाइगर की शुरुआत

बाघ की प्रजाति को बचाने के लिए भारत सरकार ने प्रोजेक्ट टाइगर इस अभियान को शुरू किया हैं | इसके द्वारा उनका संरक्षण और उनकी संख्या बचाने के लिए शुरू किया हैं |

संबंधित लेख:  अहिंसा पर निबंध - पढ़े यहाँ Essay in Hindi on Ahimsa

इस अभियान की शुरुआत सन १९७३ में बाघों की प्रजाति विलुप्त होने से बचाने के लिए की गयी थी | अभी बाघों की रक्षा के लिए अभ्यारण्यों को बनाया गया हैं |

निष्कर्ष:

बाघ को सुरक्षित रखने के लिए हम सभी लोगो को वनों की कटाई नही करनी चाहिए | उनको जीवित रहने के लिए अनुकूल वातावरण नही मिलेगा तो वह मर जाएंगे | सभी मनुष्य को और सरकार को उनको बचाने के लिए प्रयास करना होगा |

Updated: April 6, 2019 — 5:10 am

Leave a Reply

Your email address will not be published.