रानी लक्ष्मीबाई पर निबंध – पढ़े यहाँ Rani Lakshmibai Essay In Hindi

प्रस्तवना:

झांसी की रानी लक्ष्मीबाई यह एक महान वीरांगना थी | यह सन १८५७ के भातीय स्वतंत्रता संग्राम के पहले युद्ध की महान योद्धा थी |

उन्होंने अपने जीवन में कभी हार नहीं मानी | वो अपना हेतु पूर्ण करने के लिए हमेशा आत्मविश्वासी, कर्तव्य निष्ठ, स्वाभिमानी और धर्मनिष्ठ रही |

जन्म

रानी लक्ष्मीबाई इनका जन्म १९ नवम्बर १८२८ को काशी में हुआ था | उनके पिता का नाम मोरोपंत ताम्बे और माता का नाम भागीरथी बाई था | उनको सभी लोग बचपन से ही मनु कहते थे |

विवाह

रानी लक्ष्मीबाई का विवाह सन १८३८ को गंगाधर राव से हुआ था | गंगाधर राव यह झांसी के राजा थे | उनको सन १८५१ को पुत्र प्राप्ति हुई |

परंतु चार महीने के बाद उसका निधन हो गया | गंगाधर राव इनको इस बात का बहुत गहरा सदमा पहुँचा | इस सदमे को बर्दाश नहीं कर सके और २१ नवम्बर १८५३ को उनका मृत्यु हो गया |

संघर्ष

लेकिन महारानी लक्ष्मीबाई घबराई नहीं | गंगाधर राव इन्होने अपने जीवनकाल में बालक दामोदर राव इसे अपना दत्तक पुत्र माना था |

इस बात की सुचना उन्होंने अंग्रेज सरकार को दी थी | परंतु ईस्ट इंडिया कंपनी ने उस दत्तक पुत्र का अस्वीकार किया | अपने झांसी के लिए रानी लक्ष्मीबाई तीन साल तक अंग्रेजों से लढती रहीं |

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लार्ड डलहौजी ने इस दत्तक पुत्र का अस्वीकार किया और झांसी को अंग्रेजों के राज्य मी मिलाने की घोषणा कर दी | लेकिन रानी लक्ष्मीबाई के मुख से यह वाकय निकल गया की, मैं अपनी झांसी नहीं दूंगी | अंग्रेजों ने ७ मार्च १८५४ को झांसी पर अपना अधिकार प्राप्त किया |

संग्राम

रानी लक्ष्मीबाई ने झांसी की सुरक्षा के लिए उन्होंने खुद सेना को संगठित किया था | इस सेना में महिलाओं का भी सहभाग था और उन्हें प्रशिक्षण भी दिया गया | आम जनता ने भी इस संग्राम में सहभाग लिया था |

सन १८५७ में झांसी पर पड़ोसी राज्य दतिया के राजाओं ने आक्रमण किया था | परंतु इसमें रानी लक्ष्मीबाई को सफलता प्राप्त हुई |

सन १८५८ को अंग्रेज सरकारने झांसी को घेर लिया | रानी लक्ष्मीबाई इस लढाई में अपने दत्तक पुत्र दामोदर राव के साथ अंग्रेज सरकार से बचाव करने के लिए वहाँ से भागने में सफल हो गयी | इस संग्राम में तात्या टोपे इन्होने रानी लक्ष्मीबाई को साथ दी |

वीरगति प्राप्त

१८ जून १८५८ को ग्वालियर के साथ अंतिम युद्ध हुआ था | इस युद्ध में रानी लक्ष्मीबाई ने अपना महत्वपूर्ण नेतृत्व दिया | उस युद्ध में वो घायल हो गयी और झांसी की रानी लक्ष्मीबाई इनको वीरगति प्राप्त हो गयी |

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निष्कर्ष:

रानी लक्ष्मीबाई का वास्तविक रूप से एक आदर्श वीरांगना थीं | उन्होंने अपनी बहादुरी और साहस के साथ अंतिम समय तक अंग्रेजों से लढती रही और अपने वतन के लिए उन्होंने अपने जन की कुर्बानी दी |

Updated: May 15, 2019 — 10:00 am

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