आदर्श विद्यार्थी पर निबंध हिंदी में – पढो यहाँ Ideal Student Essay In hindi

प्रस्तावना :

हम सब यह जानते है की, बच्चे हमारे देश का भविष्य है| और देश की शक्ति युवा शक्ति पर निर्भर होता है, और आज के विद्यार्थी ही आने वाले कल का भविष्य बनेंगे | इसीलिए यह नारा भी बना हैं, की “ जय जवान जय किसान ” केवल युवा शक्ति पर |

एक आदर्श विद्यार्थी के कुछ लक्षण इस प्रकार है 

अखसर से हमने देखा है की विद्यार्थी तो भिन्न भिन्न प्रकार के होते है जैसे, कोई नटखट तो कोई शरारती, कोई मंद बुद्धि, तो कोई लोमड़ी की तरह होशियार किन्तु, एक आदर्श विद्यार्थी वही होता है जो अनुशासन, आज्ञाकारी, सहायक, उच्चित ज्ञान अर्थात उच्च्त-अनुच्चित में अंतर, खेल-कूद में भागीदार,समय पर पाबंद, परिशर्मी तथा प्रकर्मी हों|

विद्यार्थी का जीवन 

एक विद्याथी जीवन बहुत ही परिश्रम का होता हैं| जैसा की हम समझते है, की यदि बच्चो को जब तक माता-पिता का स्नेह मिलता है, अर्थात जबतक उनकी विद्यार्थी जीवन होता है उन्हें तो मानो की बहुत आनंद आता होगा! किंतु एसा सामन्य जीवन में नहीं है|

एक आदर्श  विद्यार्थी को परतः उठकर स्नान करके उसे सूर्य प्रणाम करना होता है, उसे प्रतिदिन जल्दी उठकर अपने तथा औरो द्वारा निरणय किये गए कार्यो को करना होता है | हालाँकि उनकी शारीरिक क्षमता सक्षम न होने के कारण,उन्हें शारीरिक परिश्रम तो नहीं हाँ किंतु उन्हें मानसिक परिश्रम तो करना ही होता है |

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और सबसे कठिन यही होता हैं| इसी लिए तो कभी अपने “ बड़ो से हम पूछते हैं की, श्रीमान आपने कितनी पढाई की हुई है, तो श्रीमान जी हँसते हुए कहते है की मै जब स्कूल गया तब मास्टर ने जब मुझे मारा मैने उनकी सिर तोड़ दिया या स्कूल ही नहीं गया ” |

कारण इसका यही है, की प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में सुख:दुख: कष्ट लगा ही रहता है, किंतु हर कोई यदि इस कष्ट से भागेगा तो जीवन नहीं जी पायेगा |

अतः उस श्रीमान को जीवन की सम्पूर्ण कष्ट अधिक कष्ट अध्यन करने में होगा इसी लिए तो सब को अपने भीतर के दुःख को छिपाते हुए इस बेढंग प्रकार का बहाना बताते है |

अर्थात विद्यार्थी जीवन भी कष्टों से भरा होता हैं| वो अलग बात है की उस समय माता-पिता होते हैं गीते समय उठाने के लिए |

आदर्श विद्यार्थी का अपने विद्यालय में व्यवहार 

यहा पर प्रयेक व्यक्ति की बात नहीं हो रही है, जिन्होंने अपने गुरुओं की बड़ी सहायता की होगी और अन्य कार्यो में सहयोग किया होगा | यहाँ पर एक आदर्श विद्यार्थी की बात हो रही है, एक आदर्श विद्यार्थी केवल अंत: से नहीं बल्कि बहाय से भी निष्ठांवां होते हैं उसे अपने गुरुजनों के साथ-साथ अपने मित्रों, अपने समाझ के प्रति तथा अपने माता-पिता के प्रति समर्पित होता है| चुकी आज ऐसा नहीं है और एक आदर्श विद्यार्थी को छोड़ो आज कोई एक सच्चा इन्सान भीं नहीं है | अर्थात सबके बस की बात नहीं है एक आदर्श विद्यार्थी बनना

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निष्कर्ष :

आज के समय में एक आदर्श विद्यार्थी तो नहीं कह सकते किंतु, इनमे से केवल एक गुण तो अपना हीं लीजिये वो हैं, अपने माता-पिता के प्रति समर्पण उनके प्रति सेवा भाव|

Updated: February 23, 2019 — 5:04 am

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