होली पर निबंध – पढ़े यहाँ Holi Essay In Hindi

प्रस्तावना:

होली यह एक रंगों का त्योहार माना जाता है| यह त्योहार मुख्य रूप से हिन्दू धर्म का त्योहार है, किंतु आज के आधुनिक युग में सभी धर्म,जाती तथा संप्रदाय के लोग होली के त्योहारको मनाने में रूचि रखते है | भारत वासी होली त्योहार को मानते हुए अपने सम्पूर्ण मतभेदों को भुला कर एक-दुसरे की ओर मित्रता का हाथ आगे बढ़ाते हैं|

होली त्योहार मनाने की विधि 

होली के दिन युवा बूढ़े बच्चे ये सभी लोग होली त्योहारको जम कर मनाते है, लोग एक दुसरे को गुलाल, अबीर तथा भिन्न-भिन्न प्रकार के रंग लगा कर होली का लुप्त उठाते है और इसका आनंद लेते हैं |

इस दिन बच्चे पानी से खूब खेल तथा उद्धंग मचाते है| अरे ये तो फिर भी ठीक ही है किंतु जो युवा होते है वे तो अंडे का भी इस्तमाल करते है शरारत के लिए जिससे की बहुत ही गंध आती है किंतु ये भी उनके आनंद का हिस्सा है |

होली के शुभ अवसर पर सभी लोगो के घरो में खूब अच्छे स्वादिष्ट पकवान बनाये जाते है जिससे की लोग इस पकवान को ग्रहण कर आनंद लेते है, जैसे की समोसा,कचोरी ,पूरी सब्जी ,खीर ,सेवइयां ,गुझिया, भजिया, हलवा इत्यादि|

इसके बावजूद की पान और मदिरा सेहत के लिए हानिकारक है, फिर भी लोग इसका सेवन करते हैं जैसे की शराब, भांग अपने ही नशें में मस्त हो जाते हैं|

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होली मानाने का कारण 

भारत के सभी लोग जानते है, की भारत में होली के त्योहार को लेकर भिन्न-भिन्न कथांएँ रही हैं| जिसमे से भक्त प्रहलाद और हिरण्यकश्यप की कथां हैं| जिसमे की असुरो का राजा हिरण्यकश्यप स्वयं को ईस्वर मानता था |

वह यह सोचता था, की में जिसे भी चाहू उसे जीवन दान तथा म्रत्यु प्रदान कर सकता हूँ, बस यही कारण है की उस राजा के राज्य में निवास करने वाले सभी निवासी उसके भय सें उसे अपना ईस्वर मानते थे| किंतु राजा के पुत्र प्रहलाद का एसा मानना नहीं था | वे सदैव से हरी(विष्णु ) जी की भक्ति करते थे और राजा हिरण्यकश्यप को क्रोध आगया और अपने पुत्र को म्रत्यु दंड देने हेतु भिन्न – भिन्न प्रकार से उसे मारने का प्रयास करने लगे जिससे की प्रहलाद मर जाए |

जैसे की ऊँचे पर्वत से प्रहलाद को नीचे खाई में फेंकना ,हाथियों से कुचलवाना ,खोलते हुए तेल में डालना आदि तब अंत में सभी प्रयासों के पराजय होने के तत्पश्चात उस क्रूर राजा को यह स्मरण हुआ की उसकी  जिसका नाम होलिका है |

उसे अग्नि में न जलने का वरदान प्राप्त होआ | तब राजा ने उसे निमंत्रित किया और प्रह्लाद को अपने गोंद में बैठने को कहा और होलिका को सुखी लकड़ियों के मंच पे जिससे की प्रह्लाद जल के राख हो जाये किंतु प्रह्लाद हरी के प्रिय भक्त तथा उनकी भक्ति ने उन्हें पुनः बचा लिया| बस यही कथा के कारण होली के पर्व को मनाया जाता हैं

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निष्कर्ष :

हमें सदैव अपने इश्वर के प्रति निष्ठावान रहना चाहिए | अटल भक्ति भी कभी हमें जिस मार्ग पे ले जाती है मानो की जीवन एक सही मार्ग पर चल रहा है | हमें प्रत्येक त्यौहार का सम्मान करना चाहिए |

Updated: March 7, 2019 — 12:45 pm

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