होली पर निबंध कक्षा ६ के लिए – पढ़े यहाँ Holi Essay In Hindi For Class 6

प्रस्तावना :

होली एक रंगों का त्यौहार हैं, जहाँ पर लोंग एक दुसरे को रंग लगाकर एक दुसरे के संग शरारत कर होली के पर्व का आनंद उठाते हैं | भारत देश में होली का पर्व अंग्रेजी महीने के फरवरी महीने में आता हैं, इन दिनों बड़ा ही अनुकूल वातावरण होता हैं|

होली का महत्व

होली के संग में पौराणिक कथाएं भी जुडी हैं | इस कथा के तहत हमें यह सिख मिलती है| की जब-जब कोई व्यक्ति ईस्वर से ऊपर उठने की प्रयत्न करता है, तब-तब वह असफल ही रहता हैं |

होली एक ऐसा पर्व हैं, जिससे की भारत में हि नहीं बल्कि विदेशो में भी यह मनोरंजन के समान मनाया जाने लगा हैं| आज के समय में जहाँ पर लोंग अपने भारतीय सभ्यता और संस्कृति को पीछे छोड़ के अपनी परम्परों से दूर आगएं हैं|

वही पर होली के पर्व से हम एक दुसरे को अपनी संस्कृति के प्रति पुनः जागरूक करते हैं,  जिससे लोग होली की इस कथा को अपने आने वाली पीढियो के लिए एकप्रेरणा दें सकें|

होली की कथा 

प्राचीन समय में जब राजाओं का युग चल रहा था, तब के शासन काल में एक हिरण्यकश्यप नाम का दुष्ट राजा हुआ करता था, जिसक एक पुत्र प्रहलाद था | और उस राजा की बहन होलिका थी, जिसे की लोग सुपनखा के नाम से भी जानते थे |

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हिरण्यकश्यप नामक राजा अपने क्रूर व्यव्हार से सम्पूर्ण राज्य में प्रचलीत था, जो की स्वयं को भगवान् के समान समझता था, वहीँ पर उसका पुत्र प्रहलाद अपने पिता को न मानकार केवल भगवान् विष्णु को ही मानता था|

और हमेशा हरी ॐ, हरी ॐ के नाम जपते रहता था, बस यही प्रहलाद का कार्य उसके पिता हिरण्यकश्यप को पसंद नहीं आया, और उसके कई बार समझाने के बाद भी वह भगवान् के स्मरण में लीन रहता था|

हिरण्यकश्यप राजा का क्रूर व्यवहार 

अपने पुत्र को ईश्वर की भक्ति करते देखने के तत्पश्चात वह अपने पुत्र को मृत्यु दंड देने हेतु विभिन्न प्रकार के उपाय करने लगा उसे हाथी के पैरो से कुचलवाने का प्रयास ,पर्वत की चोटी से खाई में फेकना आदि|

किंतु फिर भी विष्णु भगवान के कृपा से प्रहलाद का बाल भी बाका न हो सका| अतः जब राजा अपने पुत्र को मृत्यु दंड देने में असफल रहा, तब उसने अपने बहन सुपनखा को बुलवाया जिसे भगवान ब्रम्ह देव का वरदान प्राप्त था|

की सुपनखा को कोई भी अग्नि कभी जला नहीं सकती, बस अपनी बहन को राजा ने आदेश दिया की प्रह्लाद को होलिका दहन की लकडियो पर अपने गोद में लेकर बैठ जाओं किंतु होलिका जल गई, और प्रहलाद बच गया |

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होली मनाने की विधि 

होली मनाने की कुछ खास विधि हैं, होलिका के दहन के अगले हीं दिन लोगों के घरो में स्वादिष्ट पकवान बनते है|

जैसे की कचोरी, समोसे, गुझिया, खीर आदि और एक दुसरे को सम्मान देते हुए एक दुसरे को रंग लगाते हैं, और कुछ शरारत भी करते है| और कहते है की, “बुरा न मानो, होली हैं” |

निष्कर्ष :

हमारे भारत देश में विभिन्न प्रकार के पर्व मनाये जाते हैं, लेकिन आज के समय में होली केवल मनोरंजन के लिए मनाते हैं | और ऐसे पर्व का हम हृदय से स्वागत करते हैं |

Updated: March 15, 2019 — 12:02 pm

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