खो-खो के खेल पर निबंध – पढ़े यहाँ Essay on Kho Kho in Hindi

भूमिका :

खो-खो भारत का लोकप्रिय खेल है | खो-खो गाँव में खेले जानें वाला सबसे प्रियतम खेल हैं इसे खेलने के लिए केवल मैदान की आवश्यकता होती है |

खो-खो के खेल में दस-दस फुट का स्थान छोड़कर चार-चार फुट ऊँचे खंबा लगाया जाता है | खो-खो का यह खेल दो टीमों के बिच खेला जाता है, और प्रत्येक टीम में नौं खिलाडी होते हैं |

खो-खो का जन्म 

खो-खो का जन्मस्थान बड़ौदा शहर है यह गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा में यह खेल मुख्य रूप से खेला जाता है |

प्राचीन समय में खो-खो का यह खेल महाराष्ट्र में रथ पर खेला जाता था जससे यह “रथेड़ा” के नाम से जाना जाता था | खो-खो खेल के नियम २०वीं शताब्दी के आरंभ में बनाया गया था |

खो-खो खेल के बारे में जानकारी 

भारत में खो-खो की प्रथम खेल सन १९१४ में आयोजित किया गया था | खेल सभ्यता और संस्कृति का प्रमुख योगदान है यह खेल सरल है इसमें कोई खतरा नहीं है | इस खेल की सबसे पहली प्रतियोगिता १९१८ में पूना के जिमखाने में खेली गई थी |

महाराष्ट्र फिजिकल एजुकेशन समिति द्वारा इस खेल से संबंधित साहित्य को सन १९३५ से १९४९ तक विभिन्न चरणों में प्रकाशित करके प्रसारित किया गया | सन १९६० में खो-खो का यह खेल विजयवाड़ा में प्रथम राष्ट्रिय चैम्पियन शिप का आयोजन किया गया |

खो-खो का मैदान 

खो-खो का मैदान चतुर्भुज होता है जो २९ मीटर लंबा और १६ मीटर चौड़ा होता है | प्रत्येक छोर पर दो चतुर्भुज और होते हैं |

मैदान के चतुर्भुज एक तरफ १६ मीटर और दूसरी तरफ २.७५ मीटर का होता है | मैदान के दोनों तरफ लकड़ी के खम्बे लगे होते हैं बिच का रास्ता जो डंडे को छूता है वह २३.५ मीटर लंबा और ३० सेंटीमीटर चौड़ा होता है |

खो-खो खेल केनियम 

खो-खो खेल खेलने वाली टीम में से एक टीम दौड़ती है और दूसरी टीम बैठती है | बैठने वाली टीम के खिलाडी उन आठ सामानांतर भागो में से एक दूसरे की तरफ पीठ करके बैठते हैं और एक खिलाडी खम्बे के पास खड़ा होता है |

दौड़ने वाली टीम से तीन खिलाडी मैदान के बहार आते हैं | खो-खो के खेल को ९ मिनट की पारी में खेला जाता है और बिच में ५ मिनट का ब्रेक होता है | ब्रेक के बाद बैठी हुई टीम दौड़ने लगती है और दौड़ने वाली टीम के खिलाडी बैठी हुई टीम के बिच में चक्कर लगाते रहते हैं और प्रतिरोधक उन्हें रोकने का प्रयास करता है |

बैठी हुई टीम का खिलाडी खो बोलकर और पीठ को छूकर दूसरे खिलाडी को भागने के लिए बोलता है और उसके स्थान पर बैठ जाता है | पहले तीन खिलाडियों को आउट करने के बाद तीन खिलाडी और मैदान में आते हैं | इस प्रकार काम समय में सभी खिलाडियों को आउट करने वाली टीम जीत जाती है |

निष्कर्ष :

खो-खो का खेल बहुत ही सरल है, लेकिन इसे खेलने के लिए दिमाग से खेलना होता है | यह कहे बहुत ही सस्ता हो है और स्वास्थ्य के लिए बहुत ही लाभदायक होता है |

Updated: दिसम्बर 12, 2019 — 6:32 पूर्वाह्न

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