अभियंता पर निबंध – पढ़े यहाँ Engineer Essay in Hindi

भूमिका :

जीवन की सही दिशा में आगे बढ़ने के लिए लक्ष्य का होना आवश्यक है | क्योंकि व्यक्ति अपने लक्ष्य से प्रेरित होकर आगे बढ़ने का प्रयत्न करता है | दोस्तों उसी तरह से मेरे जीवन का लक्ष्य है अभियंता बनना उसके लिए मै तैयारी करना शुरू कर दिया हूँ |

अभियंता की पढाई के लिए मैनें ११वी में गणित का विषय लूंगा और अच्छे से पढाई कर अच्छा नंबर लाऊंगा | ईमानदारी के साथ कड़ी मेहनत और प्रशिक्षण के जरिये मैं अपने सपनों को साकार कर सकता हूँ | देश के संरचनात्मक ढाँचे के निर्माण में इंजिनियर का अहम् योगदान रहा है |

अभियंता दिवस क्यों मनाया जाता है 

भारत के कुशल एवं  महान अभियंता  मोक्षगुंडम विश्वेशवरैया को श्रद्धांजलि देने के लिए उनके जन्मदिन के शुभ अवसर पर १५ सितम्बर को अभियंता दिवस मनाया जाता है |

मोक्षगुंडम विश्वेशवरैया बहुत ही महान अभियंता को सफल काम में उन्हें १९५५ में भारत रत्न से सम्मानित किया गया था | अभियंता दिवस के सुभ अवसर पर पुरे देश के  सर्व श्रेष्ठ इंजीनियर के महान कार्यों के लिए उन्हें सम्मानित किया जाता है |

मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया का जीवन परिचय

मोक्षगुंडम विश्वेशवरैया  जन्म  १५ सितम्बर १८६० को कर्नाटक के कोलार जिले में मुद्देनाहल्ली गाँव में हुआ था | मोक्षगुंडम विश्वेशवरैया के पिता का नाम श्रीनिवास शास्त्री जो संस्कृत विद्वान और आयुर्वेदिक चिकित्सक थे |

उनकी माता का नाम वेंकचाम्मा था जो एक धार्मिक महिला थी | जब मोक्षगुंडम विश्वेशवरैया १५ साल के थे तब उनके पिता का देहांत हो गया था |

अभियंता द्वारा किया जाने वाला कार्य

सम्पूर्ण विश्व इतना आगे बढ़ चूका है की कोई भी काम मशीनों द्वारा संभव हो पाया है | जिसमें अभियंता का बहुत बड़ा योगदान रहा है | दस साल पहले हम जो भी परिवर्तन देख रहे हैं यह सब हमारे अभियंता द्वारा किया जानें वाला मेहनत का नतीजा है |

जिन्होनें वाहन, सड़क, पुल, भवन, कंप्यूटर, स्मार्ट  फोन  जैसे सुविधा  उत्पन्न किया  गया है |  यह सब अभियंता के मस्तिष्क की उपज का परिणाम है,  विश्व की प्रगति में  हमारे अभियंता का हाथ  है | अभियंता का एक विस्तृत क्षेत्र है, जिसमे इलेक्ट्रिकल, इलेक्ट्रोनिक, कंप्यूटर साइंस, मैकेनिकल, इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी, सिविल, केमिकल, माईनिंग, बायोकेमिकल इंजिनियरिंग आदि शामिल हैं|

आज दुनियाँ इतनी आगे बढ़ चुकी है की पहले लोग टेलिफ़ोन का इस्तेमाल करते थे और अब हाथो हाथ मोबाइल फोन हो गया है |

महान अभियंता मोक्षगुंडम विश्वेशवरैया का अवार्ड 

स्वतंत्रता के बाद १९५५ में भारत के सबसे बड़े ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया गया | लंदन इंस्टीट्यूशन सिविल अभियंता की तरफ से भी सम्मानित किये गए थे | इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ विज्ञान की तरफ से भी सम्मानित किये गए |

निष्कर्ष :

मेरे जीवन का लक्ष्य अभियंता बनना इसलिए था क्योंकि मैं चाहता हूँ कि बड़ा होकर देश की प्रगति में प्रत्यक्ष भागीदार बनकर कुछ नया सोंच कर कुछ करना मेरा लक्ष्य है | लेकिन इसके लिए अभियंता से बढ़कर कोई अच्छा क्षेत्र नहीं हो सकता है |

हिंदी में अभियंता पर निबंध के बारे में किसी अन्य प्रश्न के लिए, आप नीचे अपनी टिप्पणी छोड़ कर हमसे पूछ सकते हैं।

Updated: November 18, 2019 — 8:02 am

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