दशहरा पर निबंध कक्षा ५ के लिए – पढ़े यहाँ Dussehra Essay In Hindi For Class 5

प्रस्तावना :

हमारे भारत देश में विभिन्न प्रकार के जाति धर्म तथा संप्रदाय के लोग रहते हैं उसी प्रकार विभिन्न धर्म जातियों के विभिन्न होते हैं जिसमें से हिंदुओं का एक प्रतिष्ठित त्योहार चेहरा भी है |

जोकि संपूर्ण वर्ष में अश्विन महीने के शुक्ल पक्ष में आता है और उस पर्व को 10 दिनों तक बड़े ही मनोरंजक धार्मिक रूप से मनाया जाता है जानकर खुशी होगी कि दशहरा पर्व का मुख्य उद्देश्य तथा संदेश यही है, की असत्य पर सत्य की जीत प्राप्त करना माँ दुर्गा की अधिष्ठात्री अर्थात नवरात्रि के रूप में भी मनाया जाता है |

दशहरा पर्व मनाने की कथाएं

हमारे भारत में जब जब कोई पर्व मनाया गया है, तब तब कोई ना कोई कथाएं बनी है जिसके कारण हम उस पर्व को मनाते हैं, और उस कथा को आने वाली पीढ़ियों को समझाते हैं वैसे तो विभिन्न प्रकार की कथाएं दशहरा को लेकर की जाती हैं

किंतु ऐसा माना जाता है की, भगवान श्री राम ने रावण के दुराचार व्यवहार के कारण उनका वध किया और उनके घमंड को भी नष्ट किया था! भगवान राम ने रावण से युद्ध के पूर्व माँ दुर्गा की तपस्या की जिससे माँ दुर्गा जोकि एक युद्ध की देवी है|

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माँ दुर्गा का महिषासुर से युद्ध 

माँ दुर्गा ने चंचल महिषासुर के चंचलता और दूरव्यव्हार को रोकने हेतु कई प्रयास किए जिनमें से उन्हें आखरी प्रयास युद्ध ही उचित लगा | यह युद्ध कुल 9 दिनों तक चला तब जाकर माँ दुर्गा ने दसवे दिन महिषासुर का सफलतापूर्वक वध किया जिसके कारण दशहरा मनाया जाने लगा और दशहरा को आम भाषा में विजयदशमी तथा दशहरा के नाम से भी जाना जाता है|

दशहरा पर्व मनाने की विधि

भारत में कोई भी पर्व मनाने से पहले उसकी तैयारियां 10 दिनों से पहले से ही शुरू हो जाती हैं जिसके कारण घर में एक नई उमंग देखने को मिलती है इस दिन जगह जगह पर गांव में रामलीला और मेला का  आयोजन किया जाता है और यह धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम के रूप में माना जाता है

लोग इस मेले में झूला झूलते हैं तथा खेल तमाशा देखते हैं जिससे उनका मनोरंजन होता है इस दिन लोग एक दूसरे को जलेबी और फाफड़ा खिलाकर एक दूसरे को दशहरा की शुभकामनाएं देते हैं और अपने मन की सभी भेदभाव को भुलाकर एक नए समय का आरंभ करते हैं

निष्कर्ष:

दशहरे के पर्व से हमें यह ज्ञात होता है इस दिन सभी लोग अपने अस्त्र शस्त्र की पूजा अर्चना करते हैं माना जाता है, की उस समय में सभी के पास धनुर्धर और कुल्हाड़ी हुआ करता था|

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किंतु आज के आधुनिक जीवन में हमारे पास हमारी बुद्धि है ज्ञान है हमें इन का प्रयोग करके धैर्य से बुराई पर अच्छाई की जीत प्राप्त करनी चाहिए, जिस प्रकार माँ दुर्गा युद्ध की देवी हो कर और असीम शक्तियां होने के बावजूद उन्होंने महिषासुर को एक झटके में पराजित नहीं किया बल्कि युद्ध के नियमानुसार उन्होंने महिषासुर से युद्ध किया|

और सभी नियमों को ध्यान में रखकर उन्होंने युद्ध पर विजय प्राप्त किया इसी प्रकार हमें भी अपने जीवन में छल का उपयोग नहीं करना चाहिए अर्थात हमें अपने कर्तव्य के प्रति निष्ठावान होना चाहिए!

Updated: March 8, 2019 — 6:33 am

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