दशहरा पर निबंध कक्षा 4 के लिए – पढ़े यहाँ Dussehra Essay In Hindi For Class 4

प्रस्तावना :

दशहरा यह पर्व भारत के सभी हिन्दू धर्म के बहुत ही महत्वपूर्ण माना गया हैं| जिसके पीछे कई कहानियां है और कुछ कल्पनाएँ है |

मानना है की दशहरे की दिन माँ दुर्गा ने महिषासुर जो की एक असुर था उसके बुरे कर्मो के कारण उसे मृत्यु दंड दिया था और कुछ लोगों का कहना है| की दशरत पुत्र श्री राम जी दशहरे के दिन रावण का वध कर असत्य पर सत्य की विजय स्थापित किया था | दशहरा यह पर्व साफ तौर पर समझ आता है की यह शक्ति प्रदान करने वाला पर्व है |

दशहरा पर्व मानाने का महत्व 

भगवान् श्री राम जी ने जिस प्रकार से अपना पति धर्म निभाते हुए रावण का वध किया और यह साफ़ करदिया की शत्रु कितना भी बलशाली हो किंतु हमें अपना धैर्य ,आत्मविश्वाश नहीं खोना चाहिये|

इसी प्रकार से यह पर्व का महत्व यह है की जब भी हम कभी की संकट जैसी स्थिति में हो तब हमें धैर्य के कार्य करना चाहिए यही एक मर्यादित पुरुष का परिचय होता हैं |

दशहरा पर्व का पुराणों में यह उल्लेख किया गया है की दशहरा पर्व से संघार ही नहीं होता है, बल्कि इससे हमें इसकी मत्वाता समझाते हुए यह संदेश प्रदान करता है की जब जब बुरे कर्म बढ़ेंगे धरती पर तब तब श्री राम जी का अवतार होगा |

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दशहरा पर्व मनाने की विधि 

दसहरा पर्व के अवसर पर लोगो में खुशियाँ और हर्षोल्हास का माहोल देखने को मिलता है| इस दिन लोग अपने घर में फुल माला से गृह प्रवेश के द्वार पर हार फुल का तोरण लगते है इस दिन लोग अपने घरो में शांति पाठ भी करवाते है|

जिससे की लोगों में एक अच्छी शक्ति का संचार होता है | इस दिन लोग एक दुरे को जलेबी और फाफडा दे कर उनका मुंह मीठा करते हुए एक दुसरे को दशहरे की खूब बधाई देते है|

दशहरा मानाने का कारण 

भारत देश में प्राचीन समय में राजा रामचन्द्र अपने राज्य से अयोध्या १४ वर्षों के लिए वनवास पर भेज दिया गया था | और इसी समय वनवास के १४वें वर्ष में राम के पत्नी माता सीता देवी का रावण ने अपहरण कर लिया था |

एसा मानना है की श्री रामचन्द्र के भाई लक्ष्मण ने रावण की बहन सुपनखा की नाक काट दी थी| जिसके कारण रावण ने अपनी बहन का बदला लेने हेतु लक्ष्मण की भाभी सीता का अपहरण कर लिया था |

निष्कर्ष :

विजयदशमी या दशहरा का पर्व को मानाने यह ज्ञात होता है की कोई भी बुरी शक्ति एक सिमित समय से अधिक नहीं होती जबकि सकारात्मक शक्ति सदैव के लिए होती है |

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इसी प्रकार से रावण के पास भी भव्य असुरो की सेना था और वह स्वयं महा ज्ञानी और बलशाली था जिससे की रावण राम से युद्ध पर विजय पाने के लिए सक्षम था किंतु रावण का युद्ध नकारात्मक कार्य के लिए था और राम का युद्ध सकारात्मक कार्य तथा पतिधर्म निभाने हेतु था|

अतः नकारात्मक शक्तिया एक गुब्बारे की तरह होते है जिसका को वजूद नहीं होता, और सकारात्मक सकती अटल पर्वत के सामान होता है|

Updated: March 7, 2019 — 10:48 am

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