बालश्रम / बाल मजदूरी निबंध हिंदी में – पढ़े यहाँ Child Labour Essay In Hindi

जब कोई संस्था या व्यक्ति सरकार के बनाए नियम के विरुद्धा जा कर १४ वर्ष से कम आयु वाले बच्चे से किसी भी प्रकार की मजदूरी कराते है, तो हम इसे बाल मजदूरी कहते है बचपन यह हर किसी के जीवन का सुनहरा “पल और जरुरी अनुभव” होता है|

बाल मजदूरी पर कानून

भारत सरकार द्वारा कानून बनाया गया की कम से कम १४ वर्ष से कम आयु वाले बच्चो को किसी भी कारखाने ,आफिस या होटल में काम करवाना कानूनन अपराध है यहाँ तक की भारत में आज भी कई स्थानों में बाल मजदूरी कराइ जारही है वर्ष १९७९ में भारत सरकार ने बाल-मज़दूरी की समस्या और उससे निज़ात दिलाने हेतु उपाय सुझाने के लिए ‘गुरुपाद स्वामी समिति’ का गठन किया था।

इस समिति ने बाल मजदूरी पर विचार किया, और अपने दस्तावेज को प्रस्तुत करते हुए सरकार से ये कहा की, भारत में जब तक गरीबी रहेगी तब तक बाल मजदूरी को खत्म नहीं किया जा सकता|और बच्चे जब तक बाल मजदूरी करेंगे तब तक हमारे देश का भविष्य संकट में रहेगा |

उन्हें अच्छी शिक्षा नहीं मिलेगी और वो विकासशील नहीं होगे और जबतक बच्चे विकासशील नहीं होंगे तबतक देश विकास नहीं करेगा |

बाल मजदूरी के कारण 

गरीबी के कारण गरीब माता पिता अपने बच्चो को घर-घर और दुकानों में काम करने के लिए भेजते  है कम पढ़े लिखे लोग जहा ग्रामीण छेत्र है वहा पे बाल मजदूरी को बढ़ावा दिया जाता है| स्वतंत्र भारत देश में प्रत्येक बच्चे को अपने मित्रो के साथ खेलने का ,विद्यालय जाने का और अपने माता-पिता का प्यार पाने का पूरा अधिकार है|

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जबकि केवल लोगों ( के माता-पिता, मालिक ) की गलत समझ की वजह से बच्चों को (बचपन में ही ) बड़ों की तरह जीवन व्यतीत करने पर मजबूर होना पड़ता है। जरुरी संसाधनों की प्राप्ति के लिये उन्हें अपना बचपन कुर्बान करना पड़ रहा है।आज हमारे समाज में बाल मजरुरी यह एक अंतर्राष्ट्रीय समस्या बन चुकी है|

समस्या

अतः इसके कारण बच्चो के द्वारा करए जाने वाले मजदूरी के कारण इनका भविष्य एक बर्बादी की ओर बढ़ता जा रहा है। काफी विकासशील देशो में बच्चो से बहुत ही कड़ी श्रम कराते है और इसके बदले में उन्हे वे क़म ही पैसे देते है ताकी वे अपना जीवन निर्वाह कर सके।

उन्हें भी पढ़ने के लिए स्कूल में जाना पसंद है और अपने दोस्तों के साथ खेलने में मजा आता है उन्हें भी अपने माता पिता से प्रेम की अपेक्षा रहती जैसे की बाकि बचो को रहती है

निष्कर्ष :

देश में आजादी के बाद बाल मजदूरी को जड़ से निकालने के लिए कई सारे नियम और कानून बनाये गए  है किन्तु इससे कोई भी प्रभाव नहीं पड़ा , कारन की इसके लिए हम ही कोई पहल नहीं करते है याद रखिये की सरकार कितनी भी कानूने बना दे जब से हम ही इसके लिए एकाग्र नहीं होंगे, तब तक इससे कोई परिवर्तन नहीं होगा।

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अमीरो को गरीबो की मदद करनी चाहिए ताकि गरीब के बच्चे भी जरुरत के सभी सामान पासके जिससे उनको बाल मजदूरी नहीं करनी पड़े।

Updated: February 21, 2019 — 2:44 pm

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