तीन तलाक/ ट्रिपल तलाक पर निबंध – पढ़े यहाँ Three Divorce / Triple Divorce Essay In Hindi

प्रस्तावना :

इस देश में स्त्री और पुरुष को समान हक्क दिया गया है | लेकिन यह तीन तलाक की प्रथा मुस्लिम लोगो में आज भी है | मुस्लिम समाज में तीन तलाक की प्रक्रिया आज भी कार्यरत है | एक मुस्लिम व्यक्ति अपनी बीवी से तीन बार तलाक शब्द बोलकर इस रिश्ते को रद्द कर देता है |

मुस्लिम वर्ग की महिलाए इस तलाक के खिलाफ आवाज उठाती है और विरोध करती है | यह तीन तलाक की वजह से महिलाओं को डरकर रहना पड़ता है | तलाक शब्द उनके ज़िन्दगी को बर्बाद करता है | इस तलाक की वजह से कई महिलाओं पर यह एक प्रकार का अन्याय किया जाता है |

क़ानूनी अपराध

ट्रिपल तलाक यह मुख्य अधिकार के स्थान पर एक राजनैतिक मुद्दा बन गयी है | इस तीन तलाव को रोकने के लिए वर्तमान सरकार लोकसभा के शीत कालीन भाग में सफल हो गयी थी |

इसलिए इस विधेयक के अन्दर तीन तलाक को लेना क़ानूनी अपराध माना जाता है | इस कानून की तहत से जो भी पुरुष ट्रिपल तलाक लेता है, उसको ३ साल तक सजा हो सकती है |

तीन तलाक

मुस्लिम समाज में इस तीन तलाक को ‘तलाक उल विद्दत’ के नाम से भी जाना जाता है | मुस्लिम वर्ग की महिलाए इस तीन तलाक/ ट्रिपल तलाक के खिलाफ विरोध करती है |

तीन तलाक की समस्या

पहले ज़माने में सभी महिला अपने घर पर ही रहती थी | इसलिए हर एक महिला अपने पति के आधार पर अपना जीवन जीती थी | ऐसे समय में उसका पति उसे तलाक देता है तो उसे अपना जीवन अकेले ही संभालना पड़ता था |

इसके कारण उनके जीवन पर बहुत बड़ा प्रभाव पड़ता था | और वो अपने जीवन में अकेले हो जाती थी | उसको हर समस्या का सामना अकेले करना पड़ता था | वो पूरी तरह से टूट जाती थी | तीन तलाक यह सबसे बड़ी समस्या है जो स्त्री की पूरी जिंदगी बर्बाद कर देता है |

तीन तलाक पर प्रतिबंध

इस तीन तलाक के ऊपर बहुत सारे देशो ने प्रतिबन्ध लगाया है | जो भारत देश से अलग हो गया पाकिस्तान ने भी इस तीन तलाक को प्रतिबंध कर दिया है |

दुनिया का ‘मिस्र’ ऐसा देश जहा पर सबसे पहिले तीन तलाक पर प्रतिबंध लगवाया गया था | इस समस्या को रोकने के लिए बहुत सारे कानून बनाये गए है |

निष्कर्ष:

इस देश में तीन तलाक जैसे समस्याओं को रोकना चाहिए | जो भी व्यक्ति तीन तलाक लेगा उसके ऊपर कठोर कारवाई करनी चाहिए | भारत सरकार के द्वारा तीन तलाक के खिलाफ महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाये है |

Updated: March 9, 2019 — 8:48 am

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