स्वामी विवेकानंद पर निबंध हिंदी में – पढ़े यहाँ Swami Vivekananda Essay In Hindi

प्रस्तावना :

हमारे भारत देश बहुत सारे महान पुरुषों ने जन्म लिया है, उसमे से एक महान पुरुष स्वामी विवेकानंद भी थे | उन्होंने अपने भारत देश का नाम अमेरिका जैसे देश में रोशन किया है | स्वामी विवेकानंद एक महान हिन्दू संत और वक्ता भी थे | उन्होंने इस देश के लिए और देश में रहने वाले गरीबों के लिए अपनी जान की कुर्बानी भी दी है |

स्वामी विवेकानंद इनका जन्म

स्वामी विवेकानंद जी का जन्म १२ जनवरी १८६३ ई. कोलकाता के क्षत्रिय परिवार में हुआ | उनके माताजी का नाम भुवनेश्वरी देवी और पिताजी का नाम विश्वनाथ दत्ता था | उनका नाम नरेन्द्र नाथ दत्ता रखा गया था | स्वामी विवेकानंदजी के पिता पाश्च्यात्य सभ्यता और विश्वास रखते थे |

भारत देश में सब लोग उनके जन्म दिन पर १२ जनवरी को ‘राष्ट्रीय दिवस’ मनाते है | इस दिन को इसलिए मनाते है की युवा पिढी को प्रेरित करने के साथ – साथ उनके इस पवित्र आदर्श कों आने वाले पिढी को जगाने का उद्धेश है |

स्वामी विवेकानंद इनका शिक्षण

स्वामी विवेकानंद इन्होने ५ साल की उम्र में मेट्रोपोलीयन इंस्टीट्यूट’ में प्रवेश कर लिया | उसके बाद वो सन १८७९ में उच्च शिक्षा पाने के लिए उन्होंने ‘जनरल असेम्बली कालेज’ में प्रवेश कर लिया | उन्होंने इतिहास, दर्शन, साहित्य इ. विषयों का अध्ययन किया | स्वामी विवेकानंद जी ने बी.ए के परीक्षा में प्रथम श्रेणी उत्तीर्ण की थी |

 स्वामी विवेकानंद इनका प्राथमिक जीवन

स्वामी विवेकानंद ईश्वरीय सत्ता और धर्म को शंका के नजर से देखते थे | उनके अन्दर बहुत जिज्ञासू प्रवृत्त्ती थी | उन्होंने अपनी जिज्ञासू प्रवृत्त्ती को शांत करने के लिए वो ब्रह्मसमाज में गए | उस ब्रह्मसमाज में उनको शांति नही मिली | इसलिए उन्होंने दक्षिणेश्वर के संत रामकृष्ण परमहंस के संपर्क में आये | रामकृष्ण परमहंस इनका गहरा असर स्वामी विवेकानंद जी पर पड़ा |

इसलिए उन्होंने अपने जीवन में उनको अपना गुरु माना | कई दिनों बाद स्वामी विवेकानंद के पिताजी का देहांत हो गया | पुरे परिवार की जिम्मेदारी स्वामी विवेकानंद पर पड गयी | परन्तु उनको अच्छी नोकरी न मिलने कारण उनको बहुत मुश्किलों का सामना करना पड़ा | स्वामी विवेकानंद गुरु रामकृष्ण परमहंस के शरण में आये |

रामकृष्ण परमहंस इनके शिष्य

रामकृष्ण जी एक उच्च विचार के अध्यात्मिक व्यक्ति थे | जब स्वामी जी ने परमहंस की तारीफ सुनी उसके बाद वो उनसे मिलने गए | लेकिन उन्होंने स्वामी जो देखते ही पहचान गए और उनको काफी दिनों से उन्ही का इंतजार था | स्वामी विवेकानंद उनके सामने आये तो उन्होंने कहा उनकी आँखे एक योगी की आँखे है | स्वामी एक ऐसे व्यक्ति थे जो भारत के लोगो को नई प्रेरणा देना चाहते थे |

मिशन की स्थापना 

स्वामी विवेकानंद एक देशभक्त थे | उन्होंने भारत की गरीबी को दूर करने का प्रयास किया है | उन्होंने १ मई, १८९७ को ‘रामकृष्ण’ के नाम से एक संघटना स्थापना की, जो व्यावहारिक वेदांत और दैनंदिन सामाजिक सेवाओं के लिए जीवन में शामिल है | उनको सुभाषचंद्र बोस ने ‘आधुनिक भारत का निर्माता’ कहा है | वो बहुत ज्यादा परिश्रम करते थे इसलिए उनकी सेहत बिघड गयी और ४ जुलाई, १९०२ को उन्होंने अपना देह त्याग कर लिया |

निष्कर्ष

स्वामी विवेकानंद इन्होने गरीबों के लिए बहुत त्याग किया है | इसलिए उनको गरीबों का सेवक कहते है | इस भारत देश को उन्होंने देश देशांतरों में उज्जवल करने का हमेशा प्रयत्न किया है | उनका नाम इस देश में आज भी अजरामर है | 

Updated: February 25, 2019 — 1:45 pm

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