सरोजिनी नायडू पर निबंध कक्षा ४ का लिए – पढ़े यहाँ Sarojini Naidu Essay In Hindi For Class 4

प्रस्तावना:

इस भारत भूमि पर महान पुरुषों के साथ साथ महान महिलाओं ने भी जन्म लिया हैं | सरोजिनी नायडू यह एक साहसी और देशभक्त महिला थी | वो एक कवयित्री होने के साथ साथ कुशल राजनीतिज्ञ थी | सरोजिनी नायडू को भारत की कोकीला के रूप से जाना जाता है |

सरोजिनी नायडू का जन्म

सरोजिनी नायडू का जन्म १३ जनवरी, १८७९ को हैदराबाद में हुआ था | उनके पिता का नाम अघोरनाथ और माता का नाम बरदा सुंदरी देवी था | सरोजिनी नायडू इनकी माँ भी एक कवयित्री थी | वो बंगाली भाषा में काव्य लिखती थी |

सरोजिनी नायडू का जीवन परिचय

यह आठ भाई – बहनों से सबसे बड़ी थी | सरोजिनी नायडू इनके पिया एक वैज्ञानिक और समाज सुधारक थे | सरोजिनी नायडू को सारे गुण अपने पिता से मिले थे | यह अपने बचपन से काव्य लिखती थी |

सरोजिनी नायडू ने अपनी 12 वर्ष की उम्र में हाई स्कूल की शिक्षा प्राप्त की थी | उनकी माता को भारतीय संस्कृति से बहुत लगाव था | सरोजिनी नायडू इनको अंग्रेजी भाषा में बिलकुल रूचि नही थी |

इसलिए उनको अंग्रेजी भाषा न आने कारण उन्हें कमरे में बंद करके रखते थे | इस सजा का उनके ऊपर बहुत गहरा असर पड़ा और वो अंग्रेजी भाषा को लिखना, पढ़ना शुरू कर दिया | उसके बाद उन्होंने इस भाषा कवितायेँ भी लिखीं |

राजनीती में प्रवेश

सरोजिनी नायडू यह रॉयल लिटरेरी सोसाइटी ऑफ़ लंदन की सदस्य बनी | उसके बाद भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की अध्यक्ष भी बन गयी | यह भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की अध्यक्ष बनने वाली सबसे प्रथम महिला थी |

प्रसिद्ध कविता

उन्होंने अपने १३ वर्ष की उम्र में ‘ए लेडी ऑफ़ दी लेक’ इस नाम की बहुत बड़ी कविता लिखी | उन्हें कविता लिखना बहुत पसंद था | उन्होंने बहुत सारी कविता लिखी हैं | उनके इस सुंदर कविता और सुरबद्ध शब्दों के कारण उन्हें ‘भारत की कोकिला’ की उपमा दी हैं |

स्वतंत्रता संग्राम

सन १९०२ में गोपाल कृष्ण गोखले इनके प्रभाव में आकर वो राजनीती में सहभाग ली | सरोजिनी नायडू इन्होने स्वतंत्रता संग्राम में भी सहभाग लिया था |

इन्होंने सविनय अवज्ञा आंदोलन, सत्याग्रह आंदोलन और भारत छोड़ों आंदोलन इन सभी आंदोलन में सक्रीय भाग लिया था |

उन्हें कई बार जेल भी भेजा गया था | सरोजनी नायडू ने महात्मा गांधीजी के नमक सत्याग्रह में भी हिस्सा लिया था |

सरोजिनी नायडू की मृत्यु

सन १९४७ में देश के आज़ादी के साथ सरोजिनी नायडू को उत्तर प्रदेश की राज्यपाल बनाया गया | २ मार्च, १९४९ को काम करते हुए उनके दिल का दौरा पड़ा और उनकी मृत्यु हो गई |

निष्कर्ष:

सभी लोग उनके महान कार्य की वजह से इस भारतीय कोकिला को सदा याद करते हैं | उनका जन्म दिवस ‘भारतीय राष्ट्रीय महिला’ दिवस के रूप में मनाया जाता हैं | इस दिन पुरे देश में कई सारे कार्यक्रमों का आयोजन करके इस दिवस को मनाया जाता हैं |

Updated: April 12, 2019 — 12:54 pm

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