मोर पर निबंध हिंदी में – पढ़े यहाँ Peacock Essay In Hindi

प्रस्तावना :

भारत का राष्ट्रीय पक्षी मोर है। मोर को “मयूर” भी कहते  है। यह एक बड़ा पक्षी है। मोर सब पक्षियों में से दिखने वाला एक सुन्दर पक्षी है। जंगल ही मोर का निवास स्थान है। मोर पर कवियों ने बहुत सारी कविताएं की है।

मोर की सुंदरता

मोर हमारे जंगल का अत्यन्त सुन्दर, शर्मीला और चतुर पक्षी है। दिखने में बहुत सुन्दर और आकर्षित होते है। मोर चमकीले हरे – निले रंग के होते है। इनकी गर्दन नील रंग की और बहुत लम्बी होती है। उसकी लम्बी गर्दन पर नीला मखमली रंग होता है।  मोर के सर पर मुकुट जैसी खूबसूरत कलंगी होती है। मोर के पैर बहुत लम्बे होते है।

मोर ऊँची जगह बैठना पसंद करते है। मोर हमेशा तीन चार मोरों के साथ ही रहता है। मोर बहुत अच्छा नृत्य करता है और उसका नृत्य बहुत प्रसिद्ध है। नृत्य करते करते समय मोर अपना पंख फैलाकर बड़ा सुन्दर नृत्य  करता है। मोर ज्यादा वर्षा ऋतू नृत्य करते है। जंगल में मोर मनुष्य के सामने नहीं नाचता है। मोर शिव के पुत्र कार्तिक का वाहन है। मोर की अलग अलग प्रजातियां होती है।

मोर की प्रजाती

 लेकिन सबसे सुन्दर प्रजाति अपने भारत देश में ही है। मोर का मुँह बहुत छोटा रहता है लेकिन उसका शरीर बहुत बड़ा और वजनदार रहता है। मोर बहुत चतुर होते है। मोर को पंख होते हुए भी वो ज्यादा उड़ नहीं सकते है।

बच्चे मोर को बहुत पसंद करते है। मोर को देख कर बच्चे बहुत खुश हो जाते है। मोर के पंख  बहुत कोमल होते है। मोर खेतो में और बगीचा में पाए जाते है। मोर अनाज भी खाते है।

पक्षियों का राजा

मोर को पक्षियों का राजा भी कहा जाता है। मोर की उम्र काम से काम १० से २५ साल तक रहती है। वो हरियाली भाग में और खेतो में ज्यादा रहते है। मोर पानी के स्तोत्र विभाग के पास दिखाई देते है। इसलिए भारतीय गांव में देखा जाता है। मोर किसानों का अच्छा दोस्त भी होता है। क्यों की फसलों पर बैठने वाले कीट पतंगों को खाता है।

मोर के पंखो का उपयोग

मोर के पंख बहुत सुन्दर दिखते है। मोर को हर साल नए पंख आते है और पुराने पंख झड़ जाते है। मोर के पंखो का उपयोग सजावटी गुलदस्तों को बनाने को होता है। आजकल तो मोर के पंखो का उपयोग अलग – अलग मॉडर्न डिज़ाइन में भी किया जाता है। बाजार में इस पंखो की ज्यादा माँग रहती है।

संरक्षण कायदा

 भारत  सरकार ने १९६३ में जनवरी के अंतिम सप्ताह में उसे राष्ट्रीय पक्षी घोषित किया। हिन्दू लोग में मोर की शिकार नहीं की जाती है। पिछले कई साल से लोग मोर की शिकार करने लगे इसलिए उनकी संख्या धीरे – धीरे कम होने लगी है। लोग मोर की शिकार करने लगे इसलिए भारत सरकार ने १९७२ में संरक्षण कायदा लागु किया।

मोर का शिकार करने पर उस व्यक्ति के ऊपर सजा हो सकती है। जब से कायदा लागु हुआ तब से लोग मोर की शिकार करना बंद कर दिए और मोर की संख्या भी बढ़ने लगी। मोर का रक्षण करने के नॅशनल पार्क बनाये गए है।

निष्कर्ष:

मोर हमारे देश की शान है और उनकी शिकार होने से बचाना चाहिए | इसलिए इनकी संख्या कम होती जा रही है |

Updated: February 21, 2019 — 1:03 pm

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