मेरा प्रिय पुस्तक पर निबंध – पढ़े यहाँ Meri Priya Pustak Essay In Hindi

प्रस्तावना:

हम सभी के लिए पुस्तक बहुत जरुरी हैं | पुस्तकों से मनुष्य को अन्य विषयों का ज्ञान मिलता हैं | पुस्तक मनुष्य के साथी और मित्र होते हैं | पुस्तके हमेशा अच्छे और बुरे समय पर मनुष्य का साथ देती हैं |

पुस्तकों को पढने से हमें हर एक समस्या का निवारण करने के लिए सहायता मिलती हैं | पुस्तक को पढने से मनुष्य का मन स्वस्थ और प्रसन्न रहता हैं |

अच्छी पुस्तकों से ज्ञान प्राप्त करने से मनुष्य का मानसिक और बौद्धिक शक्ति का विकास होता हैं | हर किसी का अपना पसंदीदा पुस्तक होता हैं | उसी तरह से मेरा प्रिय पुस्तक ‘रामचरितमानस’ यह हैं |

रामचरितमानस की निर्मिती

रामचरितमानस यह पुस्तक स्वामी तुलसी दासजी के द्वारा लिखी गयी हैं | यह मेरी प्रिय पुस्तक हैं और में इसे हर रोज पढता हूँ | इस पुस्तक में भगवन श्रीराम जी के आदर्श जीवन का वर्णन किया गया हैं |

यह पुस्तक हम सभी को अच्छे मार्ग पर चलने की सीख मिलती हैं और त्याग की भावना रखने की प्रेरणा मिलती हैं |

मेरा प्रिय पुस्तक

रामचरितमानस यह मेरा प्रिय पुस्तक हैं | इस पुस्तक को जीवन का सबसे अमूल्य निधि माना जाता हैं | इस पुस्तक में पुत्र का माता – पिता के प्रति, भाई का भाई के प्रति, बहु का सास- ससुर के प्रति, पत्नी का पति के प्रति कर्तव्यों के बारे में पाता चलता हैं |

 

रामचरितमानस यह एक महाकाव्य हैं | रामचरितमानस इस ग्रंथ में सात कांड होते हैं | जैसे की बाल कांड, अयोध्या कांड, किष्किंधा कांड, सुंदर कांड और उत्तर कांड का वर्णन किया हैं |

रामचरितमानस की प्रिय लगने का कारण

रामचरितमानस यह पुस्तक मुझे इसलिए प्रिय लगता हैं की, यह अवधि भाषा और दोहा – चौपाई से लिखा गया हैं | इस पुस्तक की भाषा निर्मल के साथ – साथ प्रवाह और सजीवता यह दोनों हैं |

इसका प्रवाह कभी रुकता नही हैं बल्कि स्वच्छ रूप से बहता रहता हैं | इस पुस्तक में मुख्य रूप से अनुप्रास अलंकर मिलते हैं |

इस ग्रंथ में इतना प्रभावशाली चरित्र चित्रण किया गया हैं की, किसी भी हीनी महाकाव्य में नहीं हुआ होगा | रामचरितमानस इस पुस्तक में श्रीराम, सीता, लक्ष्मण, रावण, दशरथ और भारत इनका उल्लेख किया हैं |

रामचरितमानस की विशेषता

इस पुस्तक को पढने से समाज और परिवार की समस्याओं को दूर करने की प्रेरणा मिलती हैं | इसे एक बार पढने से बार – बार पढने को मन करता हैं |

इस पुस्तक में भक्ति और ज्ञान का, निराकार और साकार का समन्वय मिलता हैं | कवी तुलसीदास ने भक्ति और ज्ञान में भेदभाव नहीं मानते |

यह ग्रंथ एक तरीके से पवित्र गंगा की तरह हैं | जो भक्त इसे सहृदय से पढ़ते और आत्मसात करते हैं उनके लिए यह अमर वाणी की तरह हैं |

निष्कर्ष:

रामचरितमानस यह साहित्यिक और धार्मिक दृष्टिकोण से उच्चकोटि की रचना हैं | इस पुस्तक की कहानी अपनी उच्चता और भव्यता खुद कहती हैं | इसलिए यह मेरा प्रिय पुस्तक हैं |

Updated: May 22, 2019 — 12:43 pm

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *