महात्मा गाँधी पर निबंध कक्षा ४ के लिए – पढ़े यहाँ Mahatma Gandhi Essay In Hindi For Class 4

प्रस्तावना:

हमारे देश को स्वतंत्रता दिलाने के लिए बहुत सारे महान नेताओं ने अपने जीवन का त्याग किया हैं | उन सभी महान नेताओं में से महात्मा गाँधी यह एक स्वतंत्रता सेनानी थे |

इन्होंने भारत देश को आज़ादी देने के लिए जिंदगी भर संघर्ष किया | इनको सभी लोग ‘राष्ट्रपिता’ के नाम से जानते थे और हर एक बच्चा इन्हें ‘बापू’ के नाम से जानता हैं |

महात्मा गाँधीजी का जन्म

महात्मा गांधीजी का जन्म २ अक्टूबर, १८६९ को ‘गुजरात के पोरबंदर’ में हुआ था | इनका पूरा नाम मोहनदास करमचंद गाँधी था | इनके पिता का नाम करमचंद गाँधी और माता का नाम पुतलीबाई था |

शिक्षण

उन्होंने अपनी प्राथमिक शिक्षा गुजरात के स्कूल से पूरी की थी | उसके बाद उन्होंने अपनी वकालत की पढाई इंग्लैंड से पूरी की थी | बाद में वो साऊथ अफ्रीका के ब्रिटिश कॉलोनी में कानून की पढाई पूरी करने के लिए उनकों काले त्वचा लोग और गोरे त्वचा वाले लोगों के भेदभाव का सामना करना पड़ा |

इसकी वजह से उन्होंने राजनितिक कार्यकर्ता बनाने फैसला ले लिया | उसके बाद वो भारत देश वापस लौट आए और देश को आज़ादी देने के लिए उन्होंने हिंसक और शक्तिशाली आंदोलन की शुरुवात की |

सत्याग्रह आंदोलन

भारत में लौटने के बाद उन्होंने भारतीय लोगों को सहायता की | उन्होंने ब्रिटिश सरकार के खिलाफ भारतीय लोगों की मदद करने के लिए सत्याग्रह आंदोलन की शुरुवात की | उसके बाद उन्होंने सन १९२० में असहयोग आंदोलन भी किया |

नमक सत्याग्रह

महात्मा गांधीजी ने दांडी यात्रा बि की उसे नमक सत्याग्रह के नाम से जाना जाता हैं | उन्होंने नमक पर लगने वाले कर को कानून का विरोध किया था | उन्होंने अंग्रेजी सरकार के विरोध में 12 मार्च १९३० को दांडी यात्रा का आरंभ किया था |

यह यात्रा साबरमती से शुरू होकर ६ अप्रैल १९३० को गुजरात के एक तटीय गाँव में समाप्त हो गयी | इसके अंतर्गत लोगों ने खुद नमक बनान और बेचना शुरू कर दिया |

समाज सुधारक

महात्मा गाँधी यह एक स्वतंत्रता सेनानी थे और उसे साथ साथ वो एक समाज सुधारक भी थे | उनका एक ही उद्देश था की, हमारे भारत देश को आज़ादी दिलाना |

उन्होंने सभी भारतीय लोगों को प्रेरित किया और कहाँ की सभी लोगों को सामान्य जीवन जीना चाहिए और किसी को स्वावलंबी नही होना चाहिए | उन्होंने इस देश के लिए महान कार्य किया | महात्मा गांधीजी ने अंग्रेजों को भारत देश छोड़ने के लिए १५ अगस्त १९४७ को मजबूर किया |

स्वदेशी वस्तुओं का विस्तार

गांधीजी हमेशा विदेशी वस्तुओं के खिलाफ रहे | इसलिए वो स्वदेशी वस्तुओं को प्राधान्य देते थे | वो खुद चरखा चलाते थे | महात्मा गाँधी हमारे देश में स्वदेशी वस्तुओं का विस्तार करना चाहते थे |

निष्कर्ष:

उन्होंने हमारे देश को स्वतंत्र करने के लिए हिंसात्मक का मार्ग अपनाके बहुत संघर्ष किया | उन्होंने अपना पूरा जीवन देश को त्याग किया | गांधीजी देश की सेवा करते करते ३० जनवरी १९४८ को उनकी मृत्यु हो गयी | महात्मा गांधीजी हमेशा सत्या और अहिंसा में विश्वास रखते थे |

Updated: April 3, 2019 — 10:47 am

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