जन्माष्टमी पर निबंध कक्षा ५ के लिए – पढ़े यहाँ Janmashtami Essay In Hindi For Class 5

प्रस्तावना:

हमारे भारत देश में विविध प्रकार के त्योहारों को परंपराओं के अनुसार मनाया जाता हैं | इस देश में बहुत सारे त्यौहार मनाते हैं | इन सभी त्योहारों में से जन्माष्टमी यह हिन्दू धर्म का एक प्रसिद्ध त्यौहार हैं | जन्माष्टमी यह त्यौहार श्रीकृष्ण के जन्म दिवस के रूप में मनाया जाता हैं |

अलग – अलग नाम

इस त्यौहार को भिन्न – भिन्न नामों से जाना जाता हैं | जैसे की गोकुलाष्टमी, कृष्णाष्टमी, श्रीकृष्ण जयंती और अष्टमी रोहिणी इत्यादि. नामो से जाना जाता हैं |

यह हिन्दू धर्म के भगवान थे | जिन्होंने इस भूमि पर मानव जाती को बचाने और उनके दुखों को दूर करने के लिए जन्म लिया था | लोगों का मानना है की, यह भगवान विष्णु का आठवा अवतार थे |

श्रीकृष्ण का जन्म

इनका जन्म दुष्ट कंस मामा के कारावास में रात के 12 बजे हुआ था | हिन्दू कैलेंडर के अनुसार जन्माष्टमी सावन माह की कृष्ण पक्ष की अष्टमी के दिन मनाया जाता हैं | इनके पिता का नाम वासुदेव और माता का नाम देवकी था |

जन्माष्टमी के पहले दिन व्रत रखा जाता हैं और रात को १२ बजे कृष्ण जन्म हुआ था | उसके बाद घंटिया बजाकर श्रीकृष्ण की आरती की जाती हैं |

यह त्यौहार मुंबई में दहीहंडी के नाम से जाना जाता हैं | बचपन में श्रीकृष्ण मटकी में से दही चुराके खाते थे | इसलिए इस दहीहंडी में सहभाग लेने वाले बच्चों को गोविंदा कहा जाता हैं |

जन्माष्टमी की पौराणिक कथा

वासुदेव और देवकी के ८ वे पुत्र थे | देवकी यह कंस की बहन थी और देवकी का शादी वासुदेव से हुई थी | कंस यह बहुत दुष्ट और अत्याचारी था | वह अपनी बहन को रथ से ससुराल छोड़ने के लिए जा रहा था तब आकाशवाणी हुई की देवकी का ८ वा पुत्र होने वाला हैं |

इसलिए उसने वापस रथ को वापस मोड़ लिया और दोनों को कारावास में डाल दिया | उसने देवकी के ७ बच्चों की हत्या की और उसे ८ वे पुत्र को भी मारना था | उस पापी कंस के पापों को मुक्त करने के लिए श्रीकृष्ण ने कृष्ण पक्ष की अँधेरी रात में जन्म लिया था | उस दिन कारावास के द्वार अपने आप खुल गए थे |

वासुदेव ने इस मौके का अच्छे से फायदा उठाकर उन्हें नंद के घर पर छोड़ दिया था | उनका पालन पोषण यशोदा मैया ने किया था | यह यशोदा मैया के कभी लाल होते हैं तो कभी नटखट कृष्ण कन्हैया या कान्हा |

जन्माष्टमी का महत्व

येसा माना जाता हैं की, किसी स्त्री को मातृत्व नही मिलता है वह स्त्री बच्चों के लिए जन्माष्टमी का व्रत रखती हैं | यह व्रत पुरे विश्वास और श्रधा के साथ किया जाता है तो इस व्रत का फल बच्चे के आशीर्वाद के रूप में मिलता हैं |

निष्कर्ष:

संसार में पाप, अत्याचार और भ्रष्टाचार ज्यादा बढ़ने लगता हैं तो उसे खत्म करने के लिए कोई ना कोई शक्ति अपनानी चाहिए | मनुष्य को हमेशा सत्कर्म ही करना चाहिए | इसलिए हम सभी को श्रीकृष्ण के संदेशों को अपनाना चाहिए |

Updated: April 6, 2019 — 12:00 pm

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