स्वर्ण मंदिर पर निबंध – पढ़े यहाँ Golden Temple Essay In Hindi

प्रस्तावना:

स्वर्ण मंदिर यह सीख धर्म का सबसे धार्मिक पवित्र स्थल हैं | यह मंदिर अपनी धार्मिक और एकता के कारण सबसे प्रसिद्ध हैं | यहाँ पर हर एक धर्म के लोग जाते हैं | स्वर्ण मंदिर यह हरमंदिर साहिब इस नाम से जाना जाता हैं |

इस मंदिर में जाने के लिए चारों दिशाओं में दरवाजे हैं | इस मंदिर के अन्दर किसी भी धर्म के लोग भेदभाव न करके जा सकते हैं |

स्वर्ण मंदिर कहाँ स्थित हैं –

स्वर्ण मंदिर पंजाब के अमृत शहर में स्थित हैं | सीख धर्म के लिए स्वर्ण मंदिर महत्वपूर्ण माना जाता हैं | इस मंदिर को ‘अथ सत तीरथ’ के नाम से जाना जाता हैं |

स्वर्ण मंदिर का इतिहास

सीख धर्म के तीसरे गुरु अमर दास जी इनका हरिमंदिर साहिब का सपना था | लेकिन सीख धर्म के पांचवे गुरु ‘अर्जुनदेव’ इन्होंने स्वर्ण मंदिर की निर्मिती की हैं |

‘संत मिया मीर’ इनके द्वारा सन १५८८ में हरमंदिर साहब यह नाम रखवाया गया था | यह स्वर्ण मंदिर धार्मिक एकता का स्वरुप माना जाता हैं |

अमृत सरोवर

इस स्वर्ण मंदिर के चारों तरफ सरोवर हैं, उसे अमृत सरोवर कहते हैं | यह स्थान सबसे महत्वपूर्ण हैं | इस सरोवर का कार्य अर्जुनदेव जी ने पूरा किया था | ऐसा माना जाता हैं की सरोवर में स्नान करने से इच्छा पूरी हो जाती हैं | इस सरोवर में स्नान करने से सारे पाप धुल जाते हैं |

स्वर्ण मंदिर की रचना

यह मंदिर बलुआ और लाला पत्थरों से बना हुआ हैं | उसके बाद उसे सफ़ेद मार्बल से बनाया गया हैं | इस मंदिर के ऊपर सोने की परत भी चढ़ाई गयी हैं | जिसकी वजह से इस मंदिर की सुंदरता ओर बढ़ जाती हैं | यहाँ पर बहुत सारे दर्शक आते हैं |

स्वर्ण मंदिर की मुख्य विशेषता

यह मंदिर सिखों का तीर्थ माना जाता हैं |

इस मंदिर में गुरु ग्रंथ साहिब स्थापना की गयी हैं |

स्वर्ण मंदिर के बाबा बुड्ढा यह सबसे पहले पुजारी थे |

स्वर्ण मंदिर में सबसे बड़ा किचन हैं | यहाँ पर हर दिन बहुत सारे लोगों को भोजन कराया जाता हैं | यह भिजन (लंगर) के रूप से सभी लोगों तक पहुँचता हैं |

इस मंदिर में बैसाखी, लोहड़ी, शहीदी दिवस, संक्रांति इस त्योहारों के अवसर पर विशेष कार्यक्रम होते हैं | इस मंदिर में सभी त्यौहार बड़े धूमधाम से मनाये जाते हैं |

स्वर्ण मंदिर के नियम

इस मंदिर में किसी भी धर्म और जाती के लोग जा सकते हैं | लेकिन स्वर्ण मंदिर के अंदर जाते ही कुछ नियमों का पालन करना पड़ता हैं | जैसे की

मंदिर में जाते समय सबसे पहले जूते बाहर निकालके जाना पड़ता हैं |

इस मंदिर में धुम्रपान और मदिरा पान करने को मनाई हैं |

स्वर्ण मंदिर में जाते समय सर ढक के जाना पड़ता हैं | इस मंदिर के परिसर के द्वारा सर ढकने के लिए खास रूप से कपडे या स्कार्फ दिए जाते हैं |

अगर किसी को गुरुवाणी सुन्नी हैं तो उसे दरबार साहिब के अंदर जमीन पर बैठना पड़ता हैं |

निष्कर्ष:

स्वर्ण मंदिर यह बहुत खुबसूरत मंदिर हैं | यह मंदिर हिंदू, मुस्लिम और सिख धर्म के लोगों के बीच में एक महान शुभ भाव का प्रतीक माना जाता हैं | यह मंदिर सभी जाती और धर्म के लोगों को मिलजुलकर शांति के आगे बढ़ने की प्रेरणा देती हैं |

Updated: May 13, 2019 — 8:47 am

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