सरोजिनी नायडू पर निबंध – पढ़े यहाँ Essay On Sarojini Naidu In Hindi

प्रस्तावना:

हमारे इस भारत भूमि पर महान पुरुषों के अलावा इस धरती पर साहसी महिलाओं ने भी जन्म लिया हैं | उन सभी महान पुरुषों और महिलाओं ने अपने बलिदान और साहस का परिचय देते हुए भारतीय देशवासियों के दिलों में अपना स्थान बनाया हैं |

उन सभी में एक साहसी और देशभक्त महिला होने के साथ – साथ एक राजनीतिज्ञ भी थी | सरोजिनी नायडू ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया हैं |

उन्होंने देश को आजादी दिलाने के लिए काफी संघर्ष किया | सरोजिनी नायडू यह एक कवयित्री भी थी | इसलिए उन्हें ‘भारत की कोकिला’ कहा जाता हैं |

सरोजिनी नायडू का जन्म

सरोजिनी नायडू का जन्म १३ फरवरी, १८८९ को हैदराबाद (आंध्रप्रदेश) में हुआ था | उनके पिता का नाम अघोरनाथ चट्टोपाध्याय था | वो एक वैज्ञानिक और समाज सुधारक थे | उनकी माता का नाम वरदा सुन्दरी था |

उनको कई भाषाओँ का ज्ञान था | उनको कविता लिखने और पढने का बहुत शौक था | सरोजिनी नायडू यह बचपन से ही होशियार बालिका थीं | सरोजिनी नायडू ने सारे गुण अपने पिता से सीखे थे |

शिक्षा

सरोजिनी नायडू ने अपनी १२ वर्ष की उम्र में हाई स्कूल की शिक्षा प्राप्त की थी | उन्हें बचपन से ही अंग्रेजी भाषा में कोई रुचिं नहीं थी |

सरोजिनी नायडू को अंग्रेजी न आने की वजह से उनके पिता ने कई बार उन्हें एक कमरे में बंद कर दिया था | इस बात का उनके ऊपर बहुत गहरा असर हुआ और उन्होंने अंग्रेजी पढना – लिखना शुरू किया |

उन्होंने अपनी १३ वर्ष की उम्र में ‘ए लेडी ऑफ दी लेक’ यह कविता लिखी | उसके बस हैदराबाद के निजाम ने खुश होकर उन्हें इंग्लॅण्ड में पढाई के लिए भेज दिया गया |

आंदोलनों में सहभाग

सरोजिनी नायडू यह ‘रॉयल लिटरेरी सोसाइटी ऑफ लंदन’ की सदस्य भी बनी थी | उसके बाद सरोजिनी नायडू ने ‘सविनय अवज्ञा आंदोलन’, ‘सत्याग्रह आंदोलन’ और ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ में महत्त्वपूर्ण सहभाग लिया |

कई बार उन्हें जेल भी जाना पड़ा | वो भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की अध्यक्ष बनने वाली सर्वप्रथम भारतीय महिला थी | उन्होंने महात्मा गांधीजी के ‘नमक सत्याग्रह’ में अहम् भूमिका निभाई हैं |

सरोजिनी नायडू के काव्य संग्रह

‘द गोल्डन थ्रेशहोल्ड (१९०५), द फायर ऑफ़ लंदन (१९१२), द बर्ड ऑफ़ टाइम (१९१२), और ‘द ब्रोकन विंग’ (१९१७) इन सभी कविताएँ लिखी | इन सभी कविताओं के कारण उन्हें सभी लोगों ने ‘भारत की कोकिला’ की उपाधि दी |

निष्कर्ष:

सरोजिनी नायडू का जन्म दिवस हमारे भारत देश में हर साल ‘राष्ट्रीय महिला दिवस’ के रूप में मनाया जाता हैं | इस दिन सभी महिलाओं के समूहों द्वारा अन्य कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं | सरोजिनी नायडू का नाम आज भी भारत के इतिहास में सदैव अजरामर हैं |

Updated: May 27, 2019 — 11:22 am

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *