मेट्रो रेल पर निबंध – पढ़े यहाँ Essay On Metro Train In Hindi

प्रस्तावना :

आज देश के बड़े-बड़े नगरों में बढ़ती आबादी के लिए यातायात की सुविधा कर पाना एक बड़ी चुनौती बन गया है | सड़क यातायात में बढ़ते वाहनों की संख्या के कारण प्रदुषण की भयानक समस्या का जन्म होता है |

इससे बहन के निवासियों के स्वास्थ्य पर हानिकारक प्रभाव पड़ता है | इसलिए ऐसे विकल्प की नितांत आवश्यकता थी जो प्रदुषण को न बढ़ाये और यात्रा भी सुखद, सुरक्षित और आरामदायक हो |

इस समस्या से निपटने के लिए भारत की राजधानी दिल्ली में २४ दिसंबर, २००२ को तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने मेट्रो रेल का उद्घाटन किया |

दिल्ली मेट्रो

यह दिन दिल्ली के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में अंकित हो गया है | प्रारंभिक चरण में मेट्रो रेल शाहदरा से तीस हजारी तक चलाई गई | ८.३ कि.मी. केवल १३ मिनट में तय किया जिसे दिल्ली में रहने वाले निवासियों का जैसे सपना साकार हो गया |

आज के समय में मेट्रो के चार रुट हैं – पहला रुट दिलशाद गार्डन – चित्रनगर- रिठाला तक | दूसरा रुट जहाँगीर पूरी – दिल्ली विश्वविद्यालय से कश्मीरी गेट, दिल्ली रेल्वे स्टेशन, चावड़ी बाजार व राजीव चौक (कनॉट प्लेस) विजल चौक होते हुए केंद्रीय सविचालय तक |

तीसरा रुट द्वारका से राजीव चौक होकर इंद्रप्रस्थ, यमुना बैंक, नोएडा सिटी सेंटर और आनंद विहार तक | चौथा रुट केंद्रीय सविचालय से बदर पुर तक |

मेट्रो रेल से लाखों यात्रियों को सुविधा पहुंचा रही है | २०१० से इंद्रलोक- मुंडका की लाइन भी यात्रियों की सुविधा के लिए शुरू की जा चुकी है | मेट्री रेल की सुविधाएँ विश्व स्तर की हैं | यह पूर्ण रुप से वातानुकूलित है |

इससे यात्रियों का समय भी बचता है और यात्रा भी सुविधापूर्वक होती है | मेट्रो रेल की उपलब्धता लोगों को प्रदुषण से भी बचाती है | मेट्रो की यात्रा करना एक सुखद अनुभव है | यह पूरी तरह से सुरक्षित है | महिलायें इसका भरपूर लाभ उठा रही हैं |

मेट्री के द्वारा महानगरीय जीवन सुखद बनता जा रहा है | दिल्ली मेट्रो ने सन २०२१ तक २४५ की.मी. लंबी मेट्रो रेल लाइनें तैयार करने का मास्टर प्लान तैयार किया गया है |

जिसके अंतर्गत मेट्रो रेल सेवा गुड़गांव तक पहुँच गई है | भविष्य में दिल्ली, गुड़गांव, फरीदाबाद, गाजियाबाद और नोएडा आपस में जुड़ जाएगा |

मेट्रो रेल का दरवाजा स्वचालित है, इसमें प्रत्येक आने वाले स्टेशन की जानकारी दी जाती रहती है | वातानुकूलित डिब्बों में धूल, मिट्टी से बचकर लोग सुरक्षित रहें | यात्रा में लगने वाला समय भी कम हो गया है कोई भी सुचना स्क्रीन पर प्रदर्शित होती रहती है |

निष्कर्ष:

मेट्रो का किराया भी लगभग नगर बसों जैसा है | मेट्रो रेल में दिल्ली की यातायात की समस्या का तो हल किया ही है | इसके साथ-साथ प्रदुषण को भी कम किया है | दिल्ली शहर में मेट्रो एक वरदान के रुप में प्राप्त हुई है |

यदि आपके पास मेट्रो रेल पर निबंध से संबंधित कोई अन्य प्रश्न हैं, तो आप नीचे टिप्पणी करके अपनी क्वेरी पूछ सकते हैं।

Updated: March 5, 2020 — 11:11 am

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