दादी माँ पर निबंध – पढ़े यहाँ Essay on Grandmother in Hindi

भूमिका:

माँ शब्द से हम अच्छे तरह से परिचित हैं इस शब्द की गहराई इसकी महत्वता और पवित्रता को हम बहुत ही अच्छी तरह से जानते है |

माँ का रिश्ता वह रिश्ता होता है जो मनुष्य को उसके अस्तित्व के होने का एहसास दिलाता है | यदि माँ नहीं होती तो ये दुनियाँ नहीं होती |

मेरी दादी माँ 

मेरी दादी बहुत ही प्यारी है वह मुझे बहुत प्यार और दुलार करती हैं | मेरी दादी माँ की आयु ७० साल है | मेरी दादी माँ अधिक बूढी हो चुकी हैं फिर भी सुबह जल्दी उठ जाती है |

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दादी माँ को भगवद गीता और रामायण जैसी पवित्र पुस्तक पढ़ना बहुत पसंद है | मेरी दादी माँ सभी बच्चो को बहुत प्यार करती हैं |

बचपन की यादें 

बचपन में मैं जब छोटी थी तब मेरी दादी माँ रोज रात के समय मुझे परियों की कहानी सुनकर सुलाती थी | मरी दादी माँ मेरे मन पसंद का खाना बनाकर मुझे खिलाती थी |

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मेरी दादी माँ बहुत ही धार्मिक स्वभाव की है रोज सुबह शाम भगवान की पूजा अर्चन करती है |

दादी माँ के प्यारे बच्चे 

 

दादी माँ सभी के लिए लिए बहुत प्यारी होती हैं और बच्चे दादी माँ के दुलारे होते हैं | दादी माँ अपने पोता-पोती के साथ बहुत ही वशेष बंधन का साझा करती हैं |

दादी माँ को हर चीज का तजुर्बा दुगुना होता है क्योंकि दादी हमारे पापा की माँ होती हैं |

दादी माँ की शीतल छाया 

जिस प्रकार माँ एक शीतल छाया की एहसास दिलाती है उसी प्रकार दादी माँ एक मीठी सी प्यार भरी मिठास है |

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जिस बच्चे को दादी माँ का प्यार मिलता है वही उसकी अहमियत को समझता है |दादी माँ के अंदर ममता के साथ दुलार और प्यार भरा होता है |

घर की जिम्मेदारी

दादी माँ एक बूढ़े बरगद की तरह होती है जो पुरे घर की जिम्मेदारी अकेले संभालती है | मुझे जब भी मेरी दादी माँ की याद आती है तब आँखों के सामने एक तस्वीर सी घूम जाती है दादी माँ के माथे पर लाल चौड़ी सी बिंदी और बहुत ही सलीके से बंधी हुई सूती साड़ी |

हम जिसे बचपन कहते हैं वह बचपन दादी माँ के आँचल के साथ-साथ दादी के गोद के बिना अधूरा कहलाता है |

दादी माँ की कहानियां 

बचपन में दादी माँ मुझे कहानियां सुनाती थी कहानी सुनते-सुनते मुझे कब नींद लग जाती थी पता ही नहीं चलता था | मैं अक्सर कहानी सुनने के लिए दादी माँ के पास ही सोता था |

दादी माँ मुझे कहानी के साथ रामायण, तथा धार्मिक बातों को भी सुनाती थी | मैं दादी माँ की धार्मिक बातों को सुनना काफी पसंद करता था |

निष्कर्ष :

दादी माँ मुझे अपने हाथों से मेरे मन-पसंद का खाना बनाकर खिलाती थी | मुझे दादी माँ के हाथों से खाना बहुत पसंद था | दादी माँ मेरा बहुत ख्याल रखती थी | मेरी दादी माँ समाज के किसी भी कार्य में भाग लेना पसंद करती थी | दादी माँ जहाँ भी जाती थी मुझे अपने साथ लेकर जाती थी |

Updated: December 6, 2019 — 1:34 pm

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