पर्यावरण की सुरक्षा पर निबंध – पढ़े यहाँ Environmental Protection Essay In Hindi

प्रस्तावन :

हम अपने आसपास दृष्टि उठाकर जो भी दृश्य देखते हैं जैसे पेड़, पौधे, पशु, पक्षी,मानव वन यह सभी को हम प्रकृति द्वारा दिया हुआ वरदान समझते हैं जिसे आधुनिक भाषा में पर्यावरण के नाम से जानते हैं| जब हम सुबह उठते हैं, हमारे आस पास चिड़ियों की चह – चाहचाने की आवाजें हमें अति प्रसन्न करती हैं तथा मुर्गा द्वारा दिया हुआ बांग से सुबह होने का संकेत प्राप्त होती है, प्राचीन से हमने यह पाया है पर्यावरण आकर्षण का केंद्र रहा है जिसे विदेशों से लोग देखने समझने भारत देश में भी आते हैं|

पर्यावरण से होने वाले लाभ

पर्यावरण जीवन के लिए अति आवश्यक है मानव जाती यदि पर्यावरण का मोल नहीं समझेगा तो यह समझ लो की आने वाले समय में भी नहीं समझ पाएगा, पर्यावरण से हमें विभिन्न प्रकार के लाभ होते हैं पर्यावरण संतुलित रहेगा |

पृथ्वी पर खुश रहेगा पर्यावरण से एक खुशनुमा वातावरण में प्राप्त होता है वन संतुलित रहते हैं, जिसके कारण समय पर उचित औषधि समय-समय पर प्राप्त होती रहती है, और यही एक कारण है पर्यावरण हमारे आस पास के वातावरण को शुद्ध रखने में हमारा सहयोग करता है|

पर्यावरण संरक्षण हेतु किए गए कार्य

देश में स्वतंत्रता आने के पश्चात 1950 में संविधान लागू किया गया था किंतु पर्यावरण के लिए यह संविधान में कोई उल्लेख नहीं किया गया था | जिसके कारण सन 1972 में एक सम्मेलन हुआ जिसे स्टॉकहोम सम्मेलन के नाम से जाना जाता है |

इस सम्मेलन में भारत सरकार की दृष्टि पर्यावरण संरक्षण पर गई जिससे उन्होंने पाया कि हमारे देश की पर्यावरण में धार नहीं है | अर्थात उसका संतुलन भी सही नहीं है | जिसके कारण भारत देश के संविधान में 1976 में नया अनुच्छेद जोड़ने पर मजबूर हो गए, 48 ए तथा 51 ए (जी) जोर दिया गया इसमें से अनुच्छेद 48 भारत सरकार द्वारा यह संदेश देता है पर्यावरण सुरक्षा करें और उसमें निरंतर सुधार करने का प्रयत्न करते रहे तथा अनुच्छेद 51ए (जी) भारत वासियों के लिए यह है, कि हमारे पर्यावरण की शुरछा करे |

पर्यावरण हेतु तीन प्रमुख उपाय

हमारे सौरमंडल में स्थित पर्यावरण को दूषित हानी पहुंचाने वाले घटकों की उपयोग कम करना जैसे कि प्लास्टिक के बोतल प्लास्टिक के बैग तथा अन्य वह पदार्थ जो वायु जल और भूमि आसानी से ना मिश्रित हो! हमें कूड़े में फेंकने वाले उचित वस्तुओं की पुनरावृति करना चाहिए जिसे हम उन्हे पुनः उपयोग भी कहते हैं जैसे कि कांच धातु इत्यादि| हमारे आस-पास के वातावरण में पाई जाने वाले कुछ ऐसे घटक जिस काम दोबारा उपयोग कर सकते हैं करना चाहिए ऐसे प्रदूषण में बढ़ती वृद्धि को हम रोक सकते हैं|

पर्यावरण के दूषित होने पर प्रभावित घटक

पर्यावरण द्वारा वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण ,ध्वनि प्रदूषण, भूमि प्रदूषण, रेडियोधर्मी प्रदूषण तथा अन्य विभिन्न प्रकार के प्रदूषण का कारण बनता है जिससे हमारा पर्यावरण पर बुरा असर पड़ता है, और हम केवल देखते रहते हैं|

निष्कर्ष:

पर्यावरण की सुरक्षा से यही निष्कर्ष निकलता है कि यदि हम पर्यावरण पर काबू नहीं पाएंगे अर्थात अंतरित नहीं करेंगे तो आए दिन भूकंप सुनामी, भूस्खलन, ज्वालामुखी का फटना इत्यादि प्राकृतिक आपदाओं से जुड़ते रहेंगे क्योंकि जिस प्रकार पृथ्वी ग्रह जीवित रहने के लिए अति आवश्यक है ठीक उसी प्रकार पर्यावरण का संतुलित रहना भी आवश्यक है नहीं होगा तो पृथ्वी का विनाश होने में समय नहीं रहेगा|

Updated: March 8, 2019 — 12:58 pm

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