दशहरा पर निबंध कक्षा ७ के लिए – पढ़े यहाँ Dussehra Essay In Hindi For Class 7

प्रस्तावना :

दशहरा यह हिन्दूओं का धार्मिक पर्व है यह त्यौहार चन्द्रमा के अष्टमी को आता है अर्थात यह माना जाता है की बुराई पर अच्छाई की जीत | और इसे मनाते हुए लोगों में बड़ी मात्रा में उत्साह देकने को मिलता है |

यह पर्व भारतीय संस्कृति की पूज्य और महानता की मिसाल है |दशहरा का अर्थ आयुध –पूजा हिन्दुओं का एक मुख्य त्यौहार है |

प्रत्येक व्यक्ति को यह ज्ञात हो सके की वीरता ही सबकुछ नहीं होता किंतु धैर्य तथा पराक्रम भी होना आवश्यक है |

दशहरा  पर्व मनाने का महत्व

दशहरा पर्व मानाने का मूल कारण यह भी है की, असत्य पर सत्य की जीत भगवन श्री राम चन्द्र इसी दिन रावण का वध किये थे| अतः इस पर्व को असत्य पर सत्य की विजय के रूप में मनाया जाता है| यही कारण है की, दशमी को विजयदशमी के नाम से जाना जाता है|

जब यह देखा गया की इस दिन रावण का वध किया तब से इस दिन को शुभ दिन के रूप में प्रत्येक व्यक्ति शुभ कार्य करता है जैसे-गृह प्रवेश,शस्त्र पूजा,नए कार्य की प्रारंभ | दशहरा शब्द की उत्पति यह शब्द दश(दस) और हनन से निर्मित हुई है | दशहरा की लोगों के मन में कई सारी कल्पनाएँ भी है |

भगवान् श्री राम जी का रावण से युद्ध 

रावण ने भगवान श्री राम जी की धर्म पत्नी माता सीता का अपहरण कर लंका ले गया था|

उन्होंने युद्ध के पूर्व माता दुर्गा की नौ दिन तक खूब पूजा अर्चना की जिससे की वो प्रसन्न हो जाएँ, और इसके तत्पश्चात उन्होंने दसवें दिन रावण का वध कर दिया इसीकारण इस दिन को पुराणों में बहुत ही महत्व दिया है|

दशहरा का मेला 

दशहरा पर्व को मानाने के लिए भिन्न – भिन्न स्थानों पर बड़े – बड़े मेलो का आयोजन किया जाता है| जहाँ पर लोग अपने परिवार के संग मिलजुल कर आते है और मेला का खूब लुप्त आनंद उठाते है|

इस पावन मेले में लोगों द्वारा कई तरह के खाद्य पदार्थों की विक्रिय होती है| और लोग तो इस मेले में रावण के बने भव्य पुतले का दर्शन करने जाते है और इससे लोगो का इसके प्रति बहुत ही आकर्षक होता है |

रात में जब रावण को अग्नि देते है, तब मानो की आकाश में भिन्न प्रकार के सितारे जगमगाते हुए दिखाई देते है | और लोग एसा दृश्य देख कर बहुत ही खुश होते है की रावण की मृत्यु हो गयी, जिससे की असत्य पर सत्य की विजय हुआ हैं |

निष्कर्ष :

दशहरा यह एक मात्र एसा पर्व है जो की हिन्दू धर्म में एक पुतले को अग्नि प्रदान करके एक पर्व मानते है| जिससे की हमें यह प्रेरणा मिलती है की आप जितना भी बुरा कर्म करोगे अंत आपका उससे भी जादा बुरा होगा |

जैसे की रावण ने सीता माता का बुरे नियत से उनका अपहरण किया जिससे की श्री राम ने पति धर्म निभाने के लिए रावण का वध किया| किंतु लोग आज तक रावण के पुतले को जला कर उसे मरने का श्राप देते हैं |

Updated: March 7, 2019 — 9:29 am

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