भ्रष्टाचार पर निबंध – पढ़े यहाँ Corruption Essay In Hindi

प्रस्तावना:

प्राचीन समय से यह पाया गया है, कि भारत देश एक सांस्कृतिक, धार्मिक एवं साहित्यिकी में सामान्यता रखने वाला देश माना जाता है|

आज दैनिक समय में भारत अपनी संस्कृति से वंचित हो गया हैं | और भ्रष्ट आचरण के मार्ग पर चल पड़ा है, जो कि दुर्भाग्यवश हमारे भारत देश के लिए बहुत हानिकारक है |

भ्रष्टाचार का अर्थ

भ्रष्टाचार विभिन्न दो शब्दों से मिलकर बना है, जो कि भ्रष्ट तथा आचरण माना जाता है भ्रष्ट आचरण के दो अलग अर्थ है- जोकि भ्रष्ट का अर्थ है, की गलत संगत तथा गलतियों को दोहराने में मिलने वाले आनंद को भ्रष्ट कहा जाता है|

वहीं पर आचरण का अर्थ यह होता है की, आचरण मनुष्यों का चरित्र दर्शाता है, अर्थात भ्रष्टाचार का अर्थ होता है, गलत संगति से प्राप्त हुआ चरित्र जिसे हम भ्रष्टाचार कहते हैं|

भ्रष्टाचार का “मूल” कारण

प्राचीन समय में भ्रष्टाचार जैसे शब्द भारत में नहीं थे, किंतु बदलते समय के साथ – साथ भारत में भ्रष्टाचार अंग्रेजों के जमाने से ही चला आ रहा है| हालांकि 1947 के दशक में भ्रष्टाचार में कमी देखी गई थी|

किंतु आज यह कर्क रोग की तरह फैल रहा है, भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने का मूल कारण दैनिक जीवन में भौतिक अभीलासा में जीना, ऐशो-आराम का जीवन व्यतीत करना, समाज में अपनी झूठी प्रतिष्ठा बनाना, धन के स्वार्थ में अंधा हो जाना, और अधिक परिश्रम किए बिना ही धन अर्जित करना आदि यह सब भ्रष्टाचार के कुछ मूल कारण है|

भ्रष्टाचार को कम करने के उपाय

भ्रष्टाचार को समाप्त करने हेतु भ्रष्ट आचरण पर गंभीरता से विचार विमर्श करते हुए इस पर कानून तथा नियम बनाना अति आवश्यक है, लोग कानून से ना डरते हुए इस प्रकार की क्रूरता से भ्रष्टाचार कर रहे हैं|

भ्रष्टाचार पर रोकथाम हेतु एंटी करप्शन ब्यूरो जैसे नियम बनाए गए हैं तथा हमें सरकार के साथ खड़े होकर भ्रष्टाचार का विरोध करना चाहिए|

भ्रष्टाचार पर नियंत्रण पाने के लिये यह कार्य करना चाहिए की, सरकार को भारत देश के सभी “सरकारी कार्यालयों तथा दफ्तरों में सी. सी. टीवी कैमरा लगा देना चाहिए” जिससे भ्रष्टाचार पर नियंत्रण पाने में  आसानी होगी |

भ्रष्टाचार का समाज पर प्रभाव

भ्रष्टाचार का प्रभाव समाज में भिन्न – भिन्न प्रकार से पड़ा है, गरीबी, भुखमरी तथा बढ़ती महंगाई को देखते हुए जब किसी से कोई कार्य के लिए दलाली तथा उस कार्य के लिए तय की गई निश्चित राशि से अधिक राशि की मांग करना आम इंसान को क्रूर व्यवहार करने पर मजबूर कर देता है|

जिसके कारण समाज में चोरी, डकैती, लूट, कत्ल तथा बलात्कार आदि प्रकार की क्रूर तथा दुष्कर्म व्यवहार करना प्रारंभ कर देता है|

सामाजिक जीवन पर भ्रष्टाचार बहुत बुरा असर डालता है, यह हमारे समाज के लिए विडंबना है, कि सरकार इस पर रोकथाम कम करने हेतु नियम बनाने के बावजूद इसे रोकना कठिन-सा हो गया है|

निष्कर्ष:

भ्रष्टाचार भले ही विदेशों से आगमन हुआ यह संक्रामक रोग है, किंतु आज के समय में यह भारत के साथ – साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भ्रष्टाचार का कुप्रभाव विभिन्न देशों पर देखने को मिल रहा हैं|

आज भ्रष्टाचार के ही कारण भारत का समाज पूर्ण रूप से विकसित नहीं हो पा रहा हैं, यह दुर्भाग्य है, की भारत देश का नागरिक अपने आने वाली पीढ़ी के लिए अपनी बुरी पहचान छोड़ जा रहे हैं |

Updated: March 14, 2019 — 12:35 pm

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