बाल गंगाधर तिलक पर निबंध हिंदी में – पढ़े यहाँ Bal Gangadhar Tilak Essay In Hindi

प्रस्तावना :

लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक एक ऐसे स्वातंत्र्य सेनानी थे जिससे कारण उनको उग्रवादी चेतना, साहस, विचारधारा और उनकी अटूट देशभक्ति इसके लिए जाना जाता है |

लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक अपने भारत देश के एक महान नेता और राजनीतिज्ञ थे | उनका व्यक्तित्व और कार्य एक ऐसी संघर्ष की कहानी है उन्होंने नए नए युग का निर्माण किया है |

बाल गंगाधर तिलक का जन्म

बाल गंगाधर तिलक का जन्म २३ जुलाई १८५६ को महाराष्ट्र के रत्नागिरी के चिखली नामक गाँव में हुआ है | उनका जन्म एक मध्यम वर्ग के ब्राह्मण परिवार में हुआ |

उनके पिताजी का नाम गंगाधर तिलक और माता जी का नाम पार्वतीबाई था | उनके दादाजी का नाम केशवराव था | उनके दादाजी पेशवा साम्राज्य के सर्वोच्य पद पर आसीन थे | सब लोग लोकमान्य तिलक इनको बाल इस नाम पुकारते और जानते थे |

वृत्तपत्रे

इ.स १८८१ में उन्होंने केसरी और मराठा यह दो वृत्तपत्रों का संचालन किया था | केसरी यह वृत्तपत्र मराठी में से प्रसिद्ध हो गया और मराठा यह वृत्तपत्र इंग्रजी में से प्रसिद्ध हो गया |

केसरी यह वृत्तपत्र का लेखन आगरकर इनके पास था और मराठा वृत्तपत्र का लेखन लोकमान्य तिलक इनके पास था | बाल गंगाधर तिलक जी ने केसरी और मराठा में लेख लिखे थे | उनके ऊपर राजद्रोह का आरोप लगाया गया था |

लोकमान्य तिलक जी ने पुरे देश में गणेश जयंती और शिव जयंती यह दो त्योहार की शुरुवात की थी | इनकी वजह से आज देश में यह दोनों त्योहार धूमधाम से मनाये जाते है |

वैयक्तिक जीवन

लोकमान्य तिलक बुद्धि बहुत शकिशाली और प्रबल थी | उन्होंने सन १८६६ में पुणे स्कूल में प्रवेश लिया | उन्होंने सन १८८० में पुणे में इंग्लिश स्कूल की स्थापना की थी | यही से उन्होंने अपनी शिक्षा के क्षेत्र में शुरुवात की थी |

उनके पिताजी ने उनको अपने घर पर ही सब कुछ सिखाया था | उसकी वजह से उनकी स्मरण शक्ति और बढ़ गयी |

वो हमेशा अपने परिवार का सम्मान करते है | उनके माता पिता शिक्षक और बाकि सब लोगो उनके ऊपर बहुत गर्व है | उनको संस्कृत के बारे में बहुत जानकारी थी और उनको संस्कृत श्लोक याद रहते थे |

जब पेशवा राज्य का विघटन हो गया तो उसके बाद उनके परिवार की स्थिति अच्छी नही थी | लोकमान्य तिलक को बहुत मेहनत करनी पड़ी | बाल गंगाधर तिलक स्वराज्य के लिए उग्रवादी भावना को अच्छा मानते थे |

राष्ट्रीयत्व विचार

बाल गंगाधर तिलक जी ने सन १९०५ स्वदेशी आन्दोलन को पुरे देश में फैलाया था | उन्होंने राष्ट्रिय शिक्षा का प्रचार करने के साथ साथ देवनागरी लिपि का प्रयोग किया | तिलक जी ने रूस क्रांतिकारियों के साथ रहकर बम्ब बनाने और छापखाना युद्ध के शैली को सिखा था |

उन्होंने केसरी के जरिये खुदीराम बोस और प्रफुल्ल चाकी इनको फासी का विरोध किया था | इस आरोप की वजह से उनको ६ साल कला पानी की सजा सुनाई दी गई थी | उन्होंने मंडाले तुरुंग में श्रीभागवत गीता यह ग्रंथ भी लिखा |

बाल गंगाधर तिलक की मृत्यु

बाल गंगाधर तिलक जी ने अपने भारत देश को स्वतंतत्रा दिलाने के बहुत महान कार्य किया है | अपने देश के वो आखिरी वकत तक लड़ते रहे | बाल गंगाधर तिलक को 1 अगस्त १९२० को मुंबई में निमोनिया के कारण मृत्यु हो गयी |

निष्कर्ष :

उन्होंने पुरे भारत के लोगो को एक नारा दिया हुआ था ‘स्वराज्य हमारा जन्म सिद्ध अधिकार है’ | यह नारा सभी भारतवासियों को एक गौरविय और स्वाभिमान की प्रेरणा देता है | इस कार्य की वजह से इनका नाम इतिहास में आज भी अमर है |

Updated: February 28, 2019 — 8:34 am

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